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राष्ट्रपति की आपत्ति के बाद सरकार ने अध्यादेश मामले पर की गहन चर्चा


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नई दिल्ली ,(एजेंसी) 20 जनवरी । राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा ‘अध्यादेश का रास्ता’ अपनाए जाने पर आपत्ति जताए जाने के दूसरे दिन वरिष्ठ मंत्रियों ने मंगलवार को बैठक करके इस बात पर विचार किया कि हाल में जारी अध्यादेशों को अगले महीने शुरू हो रहे बजट सत्र में कैसे विधायी कार्रवाई से कानून में बदला जाए।

संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू की ओर से बुलाई गई इस बैठक में केन्द्रीय मंत्रियों में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और छह अन्य ने इस बारे में विचार किया कि कोयला जैसे क्षेत्रों से जुड़े कुछ अध्यादेशों से संबंधित विधेयक अगर संसद से पारित नहीं करवाए जा सके तो उसके क्या परिणाम होंगे।

मोदी सरकार कम से कम आठ अध्यादेश जारी कर चुकी है जिनमें बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 से बढ़ा कर 49 प्रतिशत करने वाला और कोयला खदानों की ई-निलामी से जुड़ा अध्यादेश भी शामिल है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रपति ने एक दिन पहले ही ‘अध्यादेश का रास्ता’ अपनाए जाने के प्रति सरकार को आगाह किया है। बैठक में अध्यादेशों को विधेयकों से बदलने और संसद के बजट सत्र में उन विधेयकों को पारित कराने के उपायों पर विचार किया गया। यह सत्र फरवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है।

इसमें इस पहलू पर विचार किया गया कि इनमें से कुछ अध्यादेश के बदले लाए जाने वाले विधेयकों को अगर संसद में समर्थन नहीं मिला तो उसके क्या नतीजे होंगे। उदाहरण के तौर पर अगर कोयला संबंधी अध्यादेश को विधेयक में बदल कर पारित नहीं कराया जा सका तो कोयला खानों की निलामी में बाधा आ जाएगी।

नायडू ने बताया कि इस बैठक में लगभग नौ मंत्री अपने सचिवों के साथ उपस्थित हुए और अध्यादेशों को बदलने के लिए लंबित विधेयकों को संसद से पारित कराने के बारे में विचार विमर्श हुआ। इन विधेयकों में बीमा विधेयक, कोयला विधेयक, खनन विधेयक, भूमि अधिग्रहण विधेयक और नागरिकता संशोधन विधेयक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमने इन विधेयकों के बारे में विस्तार से चर्चा की। मैंने उन्हें बताया कि क्या प्रक्रिया अपनानी होगी। पूर्व के उदाहरणों को भी सामने रखा और इनके बारे में पहले से ही नोटिस देने और दोनों भाषाओं में इनके अनुवाद मौजूद होने तथा इनकी प्रतियां (सांसदों) को: वितरित करने की जरूरत के संबंध में बताया। नायडू ने कहा कि इस बैठक में उन्होंने इन विधेयकों को पारित कराने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया और सचिवों से कहा कि वे अगले महीने के पहली तारीख तक इस संबंध में पूरी तैयारी कर लें।

बैठक में अन्य मंत्रियों में पीयूष गोयल, राव बिरेन्द्र सिंह, राधा मोहन सिंह, राधा कृष्णन सिंह, नरेन्द्र सिंह तोमर, सदानंद गौड़ा और उनके मंत्रालयों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। नियम के अनुसार किसी अध्यादेश को संसद सत्र शुरू होने के 42 दिन के भीतर विधेयक के जरिए कानून में बदला जाना जरूरी है अन्यथा वह निरस्त हो जाएगा और एक अध्यादेश केवल तीन बार पुन: जारी किया जा सकता है।


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