Wednesday , 25 November 2020
Home >> Breaking News >> जरूरत पड़ी तो बीमा बिल के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाएंगे: जेटली

जरूरत पड़ी तो बीमा बिल के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाएंगे: जेटली


23rd january news imeges

नई दिल्ली ,(एजेंसी) 23 जनवरी । फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा कि सरकार इंश्योरेंस बिल पर संसद की मुहर लगवाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा का संयुक्त सत्र बुला सकती है। सरकार इंश्योरेंस के मामले में ऑर्डिनेंस जारी कर चुकी है, जिसके अनुसार बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा 26% से बढ़ाकर 49% करने की इजाजत दी गई है। राज्यसभा में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का बहुमत नहीं है और वहां यह बिल पास नहीं हो सका था।

सभी अध्यादेशों पर एक तय वक्त में संसद की मंजूरी लेनी होती है और ऐसा न होने पर अध्यादेश खत्म हो जाता है।

वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के लिए दावोस आए जेटली ने कहा, ‘अगर इसे मंजूरी नहीं मिलती है तो हम पार्लियामेंट का ज्वाइंट सेशन बुलाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘अगर छह महीने से ज्यादा की देर हुई तो हम संसद का संयुक्त सत्र बुलाएंगे, जिसमें हमारा बहुमत होगा।’

फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि अध्यादेश के लागू रहने के दौरान किया गया कोई भी निवेश इसके लैप्स हो जाने की सूरत में भी ‘रद्द नहीं किया जा सकेगा।’ उन्होंने कहा, ‘लिहाजा हम चाहते हैं कि इनवेस्टर्स बगैर हिचक के आगे आएं। 31 मार्च के पहले जो आ चुके होंगे, उनकी तो परमानेंट एंट्री हो जाएगी।’

हालांकि जेटली ने भरोसा जताया कि राज्यसभा में बिल को पास करा लिया जाएगा क्योंकि कांग्रेस इस बिल का समर्थन कर रही है।

जेटली ने कहा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि राज्यसभा में इंश्योरेंस बिल को मंजूर कर लिया जाएगा क्योंकि मुख्य विपक्षी दल इसके पक्ष में है।’

पिछले साल मई में सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार ने नीतिगत अवरोधों को दूर करने, इकनॉमी को रिवाइव करने और इंडिया को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के वादे किए थे। साथ ही, इसने पिछली तारीख से टैक्स नियमों को लागू करने की व्यवस्था खत्म करने की बात भी की थी ताकि बड़े प्रोजेक्ट टैक्स के पचड़े में न फंसें। कांग्रेस की अगुवाई वाली पिछली यूपीए सरकार भी संसद में समर्थन न मिलने के कारण इंश्योरेंस बिल पास नहीं करा सकी थी। तब बीजेपी विपक्ष में थी और उसे इस बिल पर आपत्ति थी।
हालांकि सत्ता में आने पर बीजेपी ने इसके लिए और इसी तरह के दूसरे विधेयकों के लिए ऑर्डिनेंस का सहारा लिया ताकि यह बात दिखाई जा सके कि रिफॉर्म्स की राह पर चलने के लिए वह प्रतिबद्ध है।

जेटली ने कहा, ‘अध्यादेश लाए जाने से यह बात भी दिखती है कि संसद में अवरोध डालकर फैसलों को रोका नहीं जा सकता है। बीमा के मामले में हम कई साल बिताने के बाद किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके थे।’


Check Also

ओडिशा सरकार ने सुंदरगढ़ जिले में एक दूसरे एम्स की स्थापना के लिए जारी किया प्रस्ताव

ओडिशा सरकार ने राज्य के पश्चिमी हिस्सों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *