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यूपीए द्वारा बनाई गई सर्च कमेटी में जल्द ही बदलाव होगा


64544-modi-read नई दिल्ली,(एजेंसी) 29 जनवरी । लोकपाल के सदस्यों को नामित करने के लिए संप्रग सरकार द्वारा बनाई गयी सर्च कमेटी में जल्द ही बदलाव होगा। सरकार ने समिति में नये नाम शामिल करने की योजना बनाई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘इस समय लोकपाल के लिए कोई सर्च कमेटी नहीं है। इसका पुनर्गठन होगा।’ पिछले साल लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले संप्रग सरकार ने फरवरी में जल्दबाजी में आठ सदस्यीय सर्च कमेटी की नियुक्ति की थी जिसका अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) के टी थॉमस को बनाया गया था।

इसके अन्य सदस्यों में के. माधव राव (पूर्व आईएएस अधिकारी), एफ एस नरीमन (विधिवेत्ता), प्रोफेसर मीनाक्षी गोपीनाथ (शिक्षाविद), एम एल कुमावत (पूर्व बीएसएफ प्रमुख), एच के दुआ और प्रोफेसर मृणाल मीरी (दोनों राज्यसभा सदस्य) तथा एस वाई कुरैशी (पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त) थे। लेकिन बाद में थॉमस और नरीमन दोनों ने सर्च कमेटी में रहने से इनकार कर दिया था। समिति के कुछ सदस्यों के अनुसार उन्हें पुनर्गठन की कवायद को लेकर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से कोई संदेश नहीं मिला है।

प्रोफेसर मीरी ने कहा, ‘सरकार से अभी तक कोई संदेश नहीं मिला है।’ कुछ अन्य सदस्यों से भी संपर्क करने पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि समिति के पुनर्गठन का फैसला लेना सरकार का विशेषाधिकार है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल अगस्त में सर्च कमेटी के लिए नये नियम अधिसूचित किये थे और उसे लोकपाल के प्रमुख और अन्य सदस्यों के लिए डीओपीटी द्वारा दी गयी सूची से बाहर के नामों की सिफारिश करने के लिए अधिक आजादी दी थी।

सरकार ने सर्च कमेटी में सदस्यों की संख्या आठ से घटाकर सात कर दी है। नये नियमों के अनुसार सर्च कमेटी में कम से कम सात लोग होंगे जो भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई, लोक प्रशासन और सतर्कता मामलों आदि में विशेष ज्ञान रखने वाले होंगे। पहले के नियमों में आठ सदस्यीय समिति का काम प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति के विचार करने के लिए लोगों के नाम की सूची तैयार करने का था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले साल एक जनवरी को लोकपाल अधिनियम को मंजूरी दी थी।

लोकपाल की चयन समिति के सदस्यों में लोकसभा अध्यक्ष, सदन में विपक्ष के नेता, भारत के प्रधान न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित शीर्ष अदालत के कोई न्यायाधीश के साथ एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता होते हैं जिनका मनोनयन राष्ट्रपति या अन्य कोई सदस्य कर सकते हैं। लोकसभा में पिछले साल आठ दिसंबर को पेश किये गये एक विधेयक के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की स्थिति में सदन में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को लोकपाल की चयन समिति में शामिल करने का प्रावधान है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के किसी नेता को विपक्ष के नेता का दर्जा देने की उसकी मांग खारिज कर दी थी।


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