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यूपी : पुलिस लाइन में नर कंकाल बरामद, मामले की जांच शुरू


cease fire violation- india pakistan2 लखनऊ/उन्नाव ,(एजेंसी) 31 जनवरी । उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में पुलिस लाइन के एक कमरे से कई मानव कंकाल बरामद होने के सनसनीखेज प्रकरण की छह सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को जांच शुरू कर दी।

लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक आर. के. चतुर्वेदी ने लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने कल रात उन्नाव के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य चिकित्साधिकारी के साथ मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान वहां से 47 बोरियों में भरी मानव अस्थियां तथा 74 जार में रखे विसरा मिले।

उन्होंने बताया कि एक उपजिलाधिकारी, एक मजिस्ट्रेट, एक पुलिस उपाधीक्षक, एक चिकित्सक, एक फोरेंसिक विशेषज्ञ तथा पोस्टमार्टम कक्ष प्रभारी स्तर के अफसर की टीम इस मामले की जांच में जुट गयी है। वहां कार्यरत रहे तीन पुराने फार्मासिस्टों जी. पी. वर्मा, विमल किशोर वर्मा तथा रामपाल वर्मा से कल रात की गयी पूछताछ में पता चला है कि वर्ष 1993 तक उसी कक्ष में पोस्टमार्टम होता था और वर्ष 2008 तक वहीं पर विसरा सुरक्षित रखे जाते थे।

चतुर्वेदी ने बिताया कि 74 विसरा जार में से 58 पर लेबलिंग की गयी है। उनमें सबसे पुराना वर्ष 1980 का है जबकि सबसे आखिरी विसरा साल 2007 का है। इसके अलावा 47 बोरियों पर लेबलिंग हैं।

उन्होंने बताया कि इन अवशेषों के बारे में वर्ष 1979 से 2008 तक के दस्तावेज मौजूद हैं। अब लेबलिंग वाले विसरा तथा अस्थियों का इन दस्तावेज से मिलान करके यह देखा जाएगा कि आखिर उनका किस मुकदमे से सम्बन्ध है और उनका निस्तारण अब तक क्यों नहीं हुआ।

चतुर्वेदी ने माना कि कहीं ना कहीं कोई गड़बड़ी जरूर हुई है।

लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक आर. के. चतुर्वेदी ने कहा ‘कोई त्रुटि अवश्य हुई है। वर्ष 2009 में अलीगढ़, एटा समेत चार-पांच जगहों पर ऐसे अवशेष पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मिले थे। इसे लेकर एक नीति बनी थी कि मुकदमे से संबंधित विसरा को अदालत की इजाजत से निस्तारित किया जाएगा लेकिन जिन मामलों में अपराध उजागर नहीं हुआ उनके समयबद्ध निस्तारण के लिये प्रक्रिया तय की गयी थी।’

उपमहानिरीक्षक ने कहा कि कुछ जिलों में 2010 के बाद के मामलों में तो उस प्रक्रिया का पालन किया है लेकिन उसके पहले के मामलों में ऐसा नहीं किया गया। उन्नाव में भी सम्भवत: यही हुआ है। इस बीच, उन्नाव से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चिकित्साधिकारी गीता यादव ने बताया उनके साथ तीन डाक्टरों के एक दल जिसमें फोरेंसिक विशेषज्ञ भी हैं, ने पुलिस लाइन पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा अभिलेखों के आधार पर जांच शुरू की गयी है।

गौरतलब है कि प्रदेश के पुलिस महकमे में हडकंप मचाने वाली घटना में परसों उन्नाव पुलिस लाइन के एक कमरे से कई मानव अवशेष और अस्थियां बरामद हुई थीं। इस मामले में जिले के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की गयी है।

उन्होंने कहा था, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस कमरे का इस्तेमाल वर्ष 2008 से पहले पोस्टमार्टम के लिए होता था और एक रजिस्टर में शवों का रिकार्ड रखा गया है। रिकार्ड की पुष्टि के आदेश दिये गये हैं।


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