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मांझी मात्र ‘घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री’ बनकर रह गए हैं: सुशील


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पटना,(एजेंसी) 2 फरवरी । बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पर मात्र घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री बनकर रह जाने तथा इस मामले में अपने पूर्ववर्ती नीतीश कुमार को पीछे छोडने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि ऐसी घोषणाओं से वह जनता को धोखा दे रहे हैं।

सुशील ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मांझी ने 250 दिनों के अब तक के अपने कार्यकाल के दौरान एक हजार से ज्यादा घोषणएं कर चुके हैं जबकि उन्हें लागू करने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उनके पास मात्र 200 दिन बचे हैं।

उन्होंने कहा कि एक तरफ मांझी एक के बाद एक घोषणाएं करते चले जा रहे हैं और दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समर्थक उनके मंत्रिमंडल में शामिल अन्य मंत्री और नौकरशाह उनके आदेश पर या तो कुंडली मारकर बैठे हैं अथवा उन्हें अमली जामा पहनाने में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं ताकि वे अपनी लोकप्रियता नहीं बढा सकें।

सुशील ने कहा कि मांझी ने घोषणा की थी कि अनुसूचित जातियों जनजातियों के लोगों को ठेके में आरक्षण मिलेगा। इसी समाज के 43000 लोगों को गांवों में सफाई मित्र के रुप में तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत हर प्रखंड के पांच गांवों को विकसित किया जाएगा। किसानों से 05 किलोग्राम घान ज्यादा खरीदा जाएगा तथा आठवीं कक्षा की छात्राओं को भी साइकिल दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गया, पूर्णिया और भागलपुर में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने जैसी घोषणाएं भी कर डाली हैं लेकिन इन्हें लागू करने में वे सक्षम नहीं है। बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि गत 20 जनवरी को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पटना के नगर आयुक्त कुलदीप नारायण की निलंबन वापसी की संचिका पर दस्तखत किये थे लेकिन यह आदेश लागू नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी स्कूली छात्रों को छात्रवृत्ति और साइकिल एवं पोशाक योजना का लाभ देने के लिए 75 फीसद हाजिरी की अनिवार्यता समाप्त करने की घोषणा की थी लेकिन वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

सुशील ने आरोप लगाया कि अपने आदेशों और घोषणाओं का हश्र देखने के बावजूद मांझी ताबडतोड घोषणाएं कर अपना ही नहीं बिहार को भी मजाक का पात्र बना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के हर जिले में सैंकडों जगह पर प्रदर्शन, तोडफोड और आगजनी की घटनाएं हो रही है। बिहार सुलग रहा है लेकिन सत्तारुढ दल के नेता खींचतान और भोज की राजनीति में मशगूल हैं।

सुशील ने कहा कि उनकी पार्टी अगले बिहार विधानसभा चुनाव में अपने मिशन ‘185 प्लस’ के लक्ष्य को पाकर प्रदेश को इस विषम परिस्थिति से उबारकर सक्षम सरकार देने के लिए संकल्पित है।


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