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अबकी बार, दिलचस्प चुनाव: दिल्ली में कांटे की टक्कर के आसार, थम गया चुनाव प्रचार


bedi-kejriwal_s-650_020515085904 नई दिल्ली ,(एजेंसी) 6 फरवरी । दिल्ली में एक दिलचस्प चुनावी मुकाबला दस्तक देने को तैयार है। विधानसभा चुनाव के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। चुनाव के लिए प्रचार अभियान गुरुवार शाम 6 बजे थम गया। यहां की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए 7 तारीख यानी शनिवार को वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रीय राजधानी के करीब 1.3 करोड़ मतदाता 673 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में दर्ज करेंगे। वोटिंग शनिवार सुबह आठ बजे से शाम 6 बजे तक होगी। चुनाव नतीजों का ऐलान 10 फरवरी को किया जाएगा।

चुनाव में तीन मुख्य पार्टियों- आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच मुकाबला है और तीनों ने वोटरों को लुभाने के लिए पूरे दमखम से प्रचार किया है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, सभी पार्टियों ने शाम 6 बजे प्रचार खत्म कर दिया। यानी अब न ही किसी पार्टी की रैली होगी और न ही रेडियो या टेलीविजन के माध्यम से प्रचार होगा। हालांकि उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांग सकेंगे।

आखिरी दिन सबने फूंकी जान
प्रचार खत्म होते ही पार्टियों की ओर से भेजे जाने वाले वोट अपील वाले मोबाइल एसएमएस पर भी रोक लग गई। इधर, प्रचार के आखिरी दिन AAP और बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों ने अपनी जनसभाओं को संबोधित किया। AAP संयोजक केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में पैदल मार्च किया, जबकि किरण बेदी ने अपनी सीट कृष्णा नगर में चुनाव प्रचार किया।

कांग्रेस की प्रचार समिति के प्रमुख अजय माकन और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राजधानी में रोड शो किया. केजरीवाल नई दिल्ली, किरण बेदी कृष्णा नगर और माकन सदर बजार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। हाल के ज्यादातर ओपिनियन पोल आम आदमी पार्टी को बढ़त दिखा रहे हैं। इंडिया टुडे ग्रुप और सिसेरो के ओपिनियन पोल के मुताबिक, बहुमत के लिए AAP की राह आसान नजर आ रही है। पोल के मुताबिक वह 38 से 46 सीटें जीत सकती है, वहीं बीजेपी 19 से 25 सीटों पर सिमट सकती है।

पिछली बार बनी थी त्रिशंकु विधानसभा
याद रहे कि साल 2013 के चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा बनी थी, जिसमें बीजेपी को सबसे ज्यादा 31 सीटें मिली थीं और AAP 28 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी। कांग्रेस 43 सीटों से घटकर 8 सीटों तक सिमट गई थी। त्रिशंकु विधानसभा के बीच AAP ने जनता की राय लेने के बाद कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी, लेकिन विधानसभा में जन लोकपाल विधेयक को कांग्रेस और बीजेपी ने समर्थन नहीं दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 14 फरवरी 2014 को इस्तीफा दे दिया था। केजरीवाल के इस्तीफे के बाद 17 फरवरी से यहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। AAP की बार-बार मांग और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली में फिर से चुनाव कराने की घोषणा की गई।


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