Saturday , 26 September 2020
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दिल्ली विधानसभा में ‘आप’ ने जीता विश्वास मत


AAP
नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल नीत अल्पमत की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने गुरुवार को विश्वास मत जीत लिया है। सरकार को कांग्रेस के आठों विधायकों और जेडीयू के एक विधायक ने समर्थन दिया।

70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटों वाली आम आदमी पार्टी को सरकार बचाने के लिए कांग्रेस का समर्थन जरूरी था। आप को 37 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि विरोध में 32 मत पड़े। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 31 और उसकी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के एक विधायक ने सरकार के विरोध में मतदान किया।

विधानसभा में विश्वास मत पर हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना पक्ष रखा, जिसके बाद हुए मत विभाजन में सरकार के पक्ष में खड़े विधायकों की संख्या अधिक देख प्रोटेम विधानसभा अध्यक्ष मतीन अहमद ने सरकार के विश्वास मत हासिल करने की घोषणा कर दी और सदन की कार्यवाही शुक्रवार दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इससे पहले सरकार की तरफ से दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया ने सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया। सिसोदिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पास राष्ट्रीय राजधानी पर शासन करने का `नैतिक जनादेश` हासिल है। उन्होंने कहा, `हम सरकार बनाने की जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं, लेकिन हमारे पास 28 सीटें ही हैं जिससे हम कश्मकश की स्थिति का सामना कर रहे हैं।`

आप के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए सिसोदिया ने कहा, ‘हम यहां विकास के लिए हैं। हम देश की राजनीति को साफ करने के लिए यहां खड़े हैं। हम भरोसा दिलाना चाहते हैं कि दिल्ली की जनता को पीने के लिए साफ पानी और सस्ती बिजली मिलेगी। हम कारोबारियों, किसानों और दिल्ली के युवाओं के लिए यहां हैं। हम दिल्ली के लोगों के लिए सुविधाओं में सुधार करेंगे।’

भाजपा नेता डॉ. हर्षवर्धन ने विश्वास मत का विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी से यह बताने के लिए कहा कि आखिर वह कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के लिए क्यों मजबूर हुई। उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल ने कहा था कि वह भ्रष्ट कांग्रेस का समर्थन नहीं लेंगे तो उनके प्रति सबके दिल में सम्मान था। उन्होंने कुछ कठोर वक्तव्य भी दिए थे जैसे एक टेलीविजन चैनल पर उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने की कसम ली थी, लेकिन उनके पुत्र के नाम पर ली गई कसम टूटी तो उसपर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘एक पार्टी जिसे केजरीवाल ने सबसे भ्रष्ट पार्टी बताया, एक पार्टी जिसके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा, एक ऐसी पार्टी जिसके बारे में उन्होंने कहा कि अगर चुनाव जीतकर सत्ता में आए तो उसके भ्रष्ट मंत्रियों को जेल भेजेंगे और सरकार के सभी घोटालों को उजागर करेंगे, उन्होंने उसी पार्टी का समर्थन ले लिया। आज देश यह जानना चाहता है कि उसी पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने के पीछे उनकी क्या मजबूरी थी।’

सत्ता में आने के फौरन बाद बिजली और पानी पर लिए आप के फैसलों पर हमला करते हुए वर्धन ने कहा कि आप ने लोकप्रिय उपाय करने में जो जल्दी दिखाई है भ्रष्ट लोगों को ठिकाने लगाने में वह नजर नहीं आई। उन्होंने दावा किया कि स्वच्छ छवि वाले लोगों को सबसे ज्यादा वोट मिले। उन्होंने कहा, ‘लोगों ने सबसे ईमानदार पार्टी भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दीं, जो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। यह विडम्बना है कि 15 वर्ष से शासन कर रही सरकार से सत्ता छिन गई, वह पार्टी जिसे सबसे ज्यादा सीटें मिलीं आज विपक्ष में बैठी है और जो दूसरी स्थान पर रही उसने सरकार बना ली।’

विश्वासमत प्रस्ताव पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि अगर आप सरकार जनहित में काम करती है तो पार्टी पूरे पांच साल तक समर्थन दे सकती है। उन्होंने कहा, ‘केजरीवाल जी आप लगातार बयान दे रहे हैं कि सरकार 48 घंटे की है। मैं आज आपको आश्वस्त करता हूं कि जब तक आप दिल्ली के लोगों के हित में फैसला लेते रहेंगे तब तक आपकी सरकार को कोई खतरा नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘जरूरत पड़ने पर हम आपको पांच साल तक समर्थन करेंगे जिससे कि आप अच्छी सरकार दे सके..जब तक हमें लगेगा कि जो फैसला आपने किया है उससे विकास बाधित नहीं हो रहा है हम आपका समर्थन करते रहेंगे। लोगों के हित में और विकास के लिए आप जो भी फैसला करते हैं हमारी पार्टी का वहां समर्थन होगा।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने दिल्ली के लोगों को एक और चुनाव से बचाने के लिए सरकार को समर्थन दिया है। लवली ने बिजली और पानी आपूर्ति मुफ्त करने के फैसले पर सरकार पर यह कहते हुए हमला किया कि एक से दूसरे जगह सब्सिडी के स्थानांतरण पर सदन फैसला कर सकती है, सरकार नहीं।

लवली ने मुख्यमंत्री से कहा, ‘आप सरकार में नये हैं। अधिकारियों को आपको अच्छी तरह बताना चाहिए। पहले की बजट ने कुछ सब्सिडी मंजूर की थी और अब वह बदल नहीं सकता। सदन की हिस्सेदारी होनी चाहिए। आपको अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए जिन्होंने आपको गुमराह किया।’ उन्होंने इस पर भी आश्चर्य जताया कि अगर 1300 करोड़ रुपये सब्सिडी देने का फैसला होता है तो सरकार किन वादों को ठंडे बस्ते में डालेगी।

उन्होंने केजरीवाल से यह भी कहा कि उनकी सरकार को भ्रष्टाचार में सलिप्त लोगों और विभागों के खिलाफ ‘कड़ी कार्रवाई’ करनी चाहिए। लवली ने कहा कि केजरीवाल ने जब दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार के बारे में बात की थी तो उन्होंने एमसीडी के बारे में भी बात की थी। दिल्ली सरकार में कुछ मिले न मिले लेकिन एमसीडी में निश्चित तौर पर मिलेगा।

चर्चा के समापन के समय अपने 25 मिनट के संबोधन में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, ‘मैं तीन बातें रखना चाहता हूं। दिल्ली के आम आदमी ने देश को यह बताने में अगुवाई की है कि राष्ट्रीय राजनीति को किस दिशा में बढ़ना चाहिए। उन्हें यह भी फैसला करना चाहिए कि राजनीति में सच्चाई और ईमानदारी की लड़ाई में वे किस तरफ हैं और क्या वे इसमें भागीदार बनना चाहते हैं।’

केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी चाहे वह पिछली कांग्रेस सरकार में रहे हों, भाजपा शासित दिल्ली के तीनों नगर निगमों में हों या उनकी सरकार में हों। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी या सरकार के लिए सदस्यों का समर्थन नहीं मांग रहे बल्कि उन मुद्दों पर समर्थन मांग रहे हैं जिनका सामना दिल्ली कर रही है।

भाजपा के कटाक्ष, कि कांग्रेस का समर्थन लेने के बाद उन्होंने उसके भ्रष्टाचार की बातें करना बंद कर दिया है, के जवाब में केजरीवाल ने कहा, ‘मैं सदन को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भ्रष्ट पाए जाने वाले किसी भी शख्स के खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे चाहे वह पिछली कांग्रेस सरकार में रहे हों, दिल्ली नगर निगमों में हों या उनकी अपनी सरकार में हों।’

‘आम आदमी’ की परिभाषा बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी वह है जो ईमानदारी और सच्चाई से रहना चाहता है चाहे वह अमीर हो या गरीब हो। केजरीवाल ने कहा, ‘उनमें हर एक को आम आदमी कहा जा सकता है। हम कौन थे, हम सभी तो बाहरी थे, हम बगैर किसी काबिलियत के बहुत छोटे आदमी थे।’ उन्होंने कहा कि अपराधीकरण की वजह से राजनीति भ्रष्ट हो गयी है। भ्रष्ट राजनीति की वजह से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सड़कों की हालत खराब है।

केजरीवाल ने कहा, ‘राजनीति की सफाई के लिए हमें साथ आने की जरूरत है। हमें राजनीति में आने, चुनाव लड़ने और अपने कानून बनाने की चुनौती दी गयी थी। लड़ाई नामुमकिन थी। जीत की संभावना शून्य थी और तब हमने राजनीति में आकर इसे साफ करने का फैसला किया।’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बड़ी पार्टियों के नेताओं ने सबसे बड़ी भूल यह सोचकर की कि आम आदमी चुनाव कहां लड़ने जा रहा है। तब हमने चुनाव लड़ने का फैसला किया। लोग हमारा मजाक उड़ाते थे। चार और आठ दिसंबर को चमत्कार हुआ। मैं पहले एक नास्तिक था पर अब मैं भगवान पर यकीन करने लगा हूं। दिल्ली की जनता ने साबित कर दिया है कि सच्चाई को मात नहीं दिया जा सकता।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की जनता ने देश को यह दिखाने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है कि देश को भ्रष्ट राजनीति से किस तरह मुक्ति दिलायी जा सकती है।

चर्चा के बाद हुए मत विभाजन के पश्चात प्रोटेम स्पीकर मतीन अहमद ने विश्वास मत को ध्वनि-मत से पारित घोषित किया और सदन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले मुख्यमंत्री को बधाई दी। ‘आप’ के 28, कांग्रेस के सात, जदयू के एक और एक निर्दलीय विधायक विश्वास मत के समर्थन में खड़े हुए जबकि भाजपा के 31 तथा शिरोमणि अकाली दल के एक विधायक विश्वास मत के विरोध में।


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