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कंपनियों को अंधाधुंध काली सूची में डालने से रक्षा आपूर्ति हो सकती है प्रभावित: पर्रिकर


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नई दिल्ली,(एजेंसी) 8 फरवरी । रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार को कहा कि रक्षा साजो सामान की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को छोटे-मोटे मुद्दों को लेकर अंधाधुंध तरीके से काली सूची में डालने से सशस्त्र बलों के लिए आपूर्ति प्रणाली में समस्या आ सकती है लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध के मामलों में सजा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘आप अंधाधुंध तरीके से काली सूची में डालने की प्रवृत्ति से बच सकते हैं। मैं नहीं कह रहा कि काली सूची नहीं होनी चाहिए। यदि कोई गंभीर अपराध करता है तो उसे कठोर सजा देनी चाहिये। लेकिन जरा परिदृश्य समझिए जहां कुछ छोटे मुद्दों को लेकर हम कई कंपनियों को काली सूची में डाल देते हैं।’ पर्रिकर ‘फोरम फॉर इंटीग्रेटेड नेशनल सेक्यूरिटी’ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने ट्राटा ट्रकों पर से प्रतिबंध आशिंक रूप से हटाने का बचाव करते हुए कहा कि इसने कुछ अहम उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित की। उन्होंने कहा, ‘मैंने पाया कि कलर्जे के चलते 10 फीसदी से अधिक ट्रकों का परिचालन रुक रहा है। जरूरत के कई सारे साजो सामान का परिवहन रुक गया है क्योंकि ट्रक उपलब्ध नहीं हैं।’

मंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि रक्षा बलों की जरूरत पहली प्राथमिकता है। बेशक, हमने पूरी तरह से प्रतिबंध वापस नहीं लिया है। हमने सिर्फ यही कहा है कि इसे सिर्फ वहां इस्तेमाल किया जाये जहां यह बिल्कुल आवश्यक हो।’ गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में पर्रिकर ने कहा था कि सरकार काली सूची में डाली गई सभी रक्षा कंपनियों के मामलों के गुण दोष के आधार पर समीक्षा करने को तैयार है और आंशिक रूप से ट्राटा ट्रकों पर प्रतिबंध हटा दिया था।

पर्रिकर ने कहा कि भारत के पास रक्षा और एयरोस्पेस उत्पाद निर्यात करने की क्षमता है लेकिन रक्षा खरीद में अड़चन को हटाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘अड़चने हैं। मैंने पाया कि किसी तर्क के चलते या समझ की कमी या नीति की कमी के चलते अड़चनें नहीं है बल्कि पिछले करीब आठ साल से अधिक समय में हमने खुद को एक दायरे में जकड़ लिया है।’

रक्षा मंत्री ने पिछली संप्रग सरकार को परोक्ष रूप से निशाना बनाते हुए कहा, ‘हमने प्रक्रियागत अड़चनों का एक जाल इतना अधिक बुन दिया कि 2006 या 2007 से चली फाइल मेरे पास अभी तक नहीं आ रही है।’ पर्रिकर ने उद्योग को भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय उनकी चिंताएं दूर करने के लिए नयी रक्षा खरीद प्रक्रियाएं लेकर आएगा।


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