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दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध 412 प्रतिशत बढ़ा


Women Crimes
नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली में वर्ष 2012 के मुकाबले 2013 में आपराधिक घटनाओं में जहां 43.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है वहीं बीते वर्ष की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 412 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह जानकारी पुलिस ने शुक्रवार को दी। 2013 में भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत 73,958 मामले दर्ज किए गए, जबकि इससे पिछले वर्ष में 51,479 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस 48.8 प्रतिशत मामलों को हल करने में सफल रही।

दिल्ली के पुलिस आयुक्त बी. एस. बस्सी ने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “पुलिस थानों को हर शिकायत दर्ज करने और लोगों को खाली हाथ वापस न जाने देने की सख्त हिदायत दी गई है। इस वजह से शिकायतों में वृद्धि हुई है।” पुलिस के आंकड़े से संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय राजधानी ने 16 दिसंबर 2012 को हुए दिल दहला देने वाली दुष्कर्म की घटना से कोई सबक नहीं सीखा है। महिलाओं के साथ छेड़खानी की जहां वर्ष 2012 में 653 घटनाएं दर्ज की गई थी वहीं इस तरह के मामले में नाटकीय वृद्धि हुई और 2013 के दौरान ऐसे 3,347 मामले दर्ज किए गए। ऐसे मामलों में 412 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसी तरह पूर्व वर्ष में जहां दुष्कर्म के 680 मामले दर्ज किए गए थे वहीं बीते वर्ष में 1559 मामले दर्ज किए गए। इस तरह के 96 प्रतिशत मामलों में आरोपी जान पहचान के लोग पाए गए। पुलिस ने कहा है कि 90 प्रतिशत मामले हल कर लिए गए हैं।

बस्सी ने कहा, “महिलाओं के प्रति हुए अपराध में 77 प्रतिशत मामले पहले सप्ताह के दौरान हल कर लिए गए और शेष 9 प्रतिशत मामले दूसरे सप्ताह में हल कर लिए गए।” बस्सी ने कहा, “नए आदेश के तहत दुष्कर्म के मामले में आरोपी के गिरफ्तार होने के 20 दिनों के भीतर आरोप पत्र दायर किया जाएगा।” आयुक्त ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय अमल में लाए जा रहे हैं। इन उपायों में महिला कॉलेजों के बाहर पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) के वाहन की तैनाती आदि शामिल है।

महिला सहायता के लिए टेलीफोन नंबर 1091 का व्यापक रूप से प्रचार किया गया है और इसके लाइनों की संख्या चार से 10 की गई है। इसी तरह सहायता के लिए 100 नंबर की लाइनों की संख्या 100 की गई है। यह पहले 60 हुआ करती थी। इसके अलावा इस वर्ष 370 अतिरिक्त पीसीआर वैन शामिल किए गए हैं जिससे ऐसे वाहनों की संख्या 807 हो गई है।

इस वर्ष दिल्ली पुलिस विशेष रूप से बच्चों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अब बच्चों के लापता होने की शिकायत मिलने के तुरंत बाद ही एफआईआर दर्ज किए जाएंगे। वर्ष 2012 में अपहरण की 30503 वारदातें दर्ज की गई थी जिसके मुकाबले बीते वर्ष 5,565 मामले दर्ज किए गए।


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