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केजरीवाल ने किया साबित, बंदे में है दम


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नई दिल्ली,(एजेंसी)10 फरवरी । दिल्ली में आम आदमी पार्टी का झाड़ू ऐसा चला कि उसके गुबार में सब गायब हो गए। 2013 के चुनाव में 32 सीटों पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी तीन सीटों पर सिमट कर रह गई, और कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुला। ये वही अरविंद केजरीवाल थे जिन्हें विरोधियों नें भगोड़ा और अनार्किस्ट जाने क्या-क्या कहा था। लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद तो आम आदमी पार्टी का बुलबुला फूटने तक की भविष्यवाणी कर दी गई थी, लेकिन केजरीवाल ने एक बार फिर साबित किया कि बंदे में है दम।

जीत से जीत तक केजरीवाल का एक साल का सफर दिल्ली की जनता ने इस बार तय कर दिया पांच साल- केजरीवाल आम आदमी पार्टी की जीत का अनुमान था, लेकिन जीत इतनी बंपर होगी इसका अंदाजा भी नहीं था। तमाम एक्जिट पोल झूठे साबित हुए। दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को किंग बना दिया। जैसे-जैसे जीत का आंकड़ा बढ़ता गया। विरोधी खेमे में मुर्दनी छाती गई। और आम आदमी पार्टी के हलके में हौसला आसमान पर था।
मफलर बांध कर घूमने वाले मामूली से आम आदमी ने ऐसा झाड़ू चलाया कि विकराल विरोधी धूल की तरह उड़ गए। वो दिल्ली की जनता के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहा। उसकी सहजता ने, उसकी विनम्रता ने दिल्ली का दिल जीत लिया। ये विनम्रता जीत के बाद भी जस की तस बनी रही।

मोदी लहर पर सवार बीजेपी को अंदाजा भी नहीं था कि दिल्ली में उसका विजय रथ इस तरह रूक जाएगा। पार्टी को नेता विपक्ष की हैसियत हासिल करने लायक सीटों के भी लाले पड़ गए। पार्टी ने जिस किरण बेदी पर भरोसा कर सीएम उम्मीदवार बनाया था वो खुद अपनी सीट हार गईं। उन्हें कृष्णानगर की परंपरागत सीट से उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन आप की आंधी में किरण भी नहीं बचीं उन्हें भी केजरीवाल का लोहा मानना पड़ा।

कांग्रेस तो इस आंधी में जैसे टिक ही नहीं पाई। पार्टी का जनाधार पूरी तरह खिसक कर आम आदमी पार्टी के खाते में चला गया। पिछली बार बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन किया था। इस बार उसके वोटर ने बिना उसे बताए आम आदमी पार्टी से गठबंधन कर लिया। जब अजय माकन अपनी भी सीट न बचा पाए तो उनके पास केजरीवाल को बधाई देने के सिवा कोई चारा नहीं था।

जाहिर है जनता ने 49 दिन के शासन पर भरोसा दिखाते हुए केजरीवाल को 5 साल के लिए मौका दिया है। अब बारी केजरीवाल की है, केजरीवाल की टीम की है, आम आदमी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की है उन्हें इस इकतरफा जीत के बदले दिल्ली की जनता को काम करके दिखाना है।


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