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जल्द ही ट्रेड असोसिएशंस की बैठक बुलाएंगे केजरीवाल


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नई दिल्ली ,(एजेंसी) 16 फरवरी । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शपथ ग्रहण के बाद अपने भाषण में ट्रेडर्स के नाम खास संदेश में यह जता दिया था कि उनके अजेंडे में वैट को लेकर किए गए वादे काफी अहम हैं। आधिकारिक और पार्टी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री जल्द ही दिल्ली के सभी बड़ी ट्रेड असोसिएशंस की बैठक बुलाएंगे, जिसमें पार्टी की ओर से जारी ट्रेड विजन को लागू करने की दिशा में चर्चा होगी। हालांकि यह तय माना जा रहा है कि नई सरकार वैट सरलीकरण के मामले में वह तेजी नहीं दिखाएगी, जो 49 दिनों वाली सरकार के दौरान दिखी थी।

सूत्रों ने बताया कि बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन वैट और दूसरे विभागों को इसकी रूपरेखा तैयार करने को पहले ही कह दिया गया है। पार्टी की धमाकेदार जीत के तुरंत बाद पार्टी की ट्रेड विंग ने वैट अधिकारियों से मिलकर अपने वादों को अमली जामा पहनाने की संभावना तलाशनी शुरू कर दी थी। पिछले कार्यकाल में वित्त विभाग खुद अरविंद के पास था, लेकिन इस बार यह जिम्मेदारी डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया को दी गई है।

सिसोदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि कोई भी नीतिगत फैसला स्टेकहोल्डर्स के साथ मीटिंग के बाद ही होगा। सिसोदिया ने ट्रेड मैनिफेस्टो सहित कोई भी वादा लागू करने की समयसीमा तो नहीं बताई, लेकिन यह संकेत दिया कि स्टेकहोल्डर्स के साथ मीटिंग में खुद मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री एक निजी कार्यक्रम में 1 मार्च को पुरानी दिल्ली के कारोबारियों के साथ रूबरू होंगे, लेकिन यह स्टेकहोल्डर्स के साथ होने वाली आधिकारिक बैठक नहीं होगी। आधिकारिक बैठक इसके पहले भी बुलाई जा सकती है।

पार्टी ट्रेड विंग के कन्वेनर ब्रजेश गोयल ने बताया कि ट्रेडर्स के साथ मीटिंग की रूपरेखा तैयार की जा रही है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा। हो सकता है कि सरकार छोटी-मोटी रियायतें आने वाले दिनों में ही दे दे, क्योंकि पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान भी काफी असोसिएशंस के साथ चर्चा कर ली थी। उन्होंने कहा, ‘सीएम ने साफ कर दिया है कि अब ट्रेडर्स को कोई भी अधिकारी परेशान नहीं करेगा और न ही कोई उनकी दुकान पर छापेमारी करने पहुंचेगा। जो लोग ईमानदारी से टैक्स भरेंगे, उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है।’

हालांकि मुख्यमंत्री के बयान को बाजारों में अलग-अलग नजरिए से भी देखा जा रहा है। कई असोसिएशंस को आशंका है कि बड़े वादों के साथ फंड की चुनौती लेकर आई सरकार टैक्स वसूली में कोई कोताही नहीं बरतेगी और दूसरे रास्तों से ही सही विभाग की सख्ती बढ़ेगी।


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