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पीएम रिपोर्ट में हत्या तो फिर सीबीआई ने कैसे आत्महत्या बताया


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लखनऊ/ बरेली,(एजेंसी) 20 फरवरी । डिप्टी सीएमओ वाई एस सचान, कुंडा कांड के बाद सीबीआई बदायूं कांड में भी सवालों में घिरती जा रही है। पीड़ित पक्ष की तरफ से सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट फाइल किया है। पीड़ित पक्ष के वकील ने सबसे मजबूत पहलू कोर्ट के सामने पेश करते हुए सवाल उठाया है कि जब दोबारा पोस्टमार्टम नहीं हुआ तो फिर आत्महत्या के तथ्य कहां से लाए गए, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफतौर पर कहा गया है रेप और हत्या होने की बात आई है। अब मामले की सुनवाई 11 मार्च को होगी।

स्आदतगंज की दो चचेरी बहनों की लाश 28 मई 2014 को गांव के बाहर पेड़ से लटकी मिली थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टर ने रेप की आशंका और हत्या होने की बात लिखी थी। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफतार कर जेल भेज दिया था। लेकिन बाद में जांच सीबीआई को दे दी गई। एजेंसी ने आरोपियों की जमानत अर्जी के खिलाफ आपत्ति न कर क्लीन चिट दे दी, जिससे सभी आरोपियों की जमानत हो गई। बाद में पाक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि किषोरियों के साथ न रेप हुआ और न उनकी हत्या हुई, बल्कि दोनों ने आत्महत्या की।

पीडित पक्ष ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए, प्रोटेस्ट फाइल करने की बात कही, और सीबीआई से साक्ष्य मांगे। इस पर सीबीआई न केवल साक्ष्य देने से इनकार किया बल्कि पीड़ित परिवार को आरोपी साबित कराने की कोशिश की। कोर्ट के हस्तक्षेप से सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट पीड़ित पक्ष को दे दी, लेकिन सभी साक्ष्य अभी तक नहीं दिए। उपलबध साक्ष्य के आधार पर पीडित पक्ष के वकील ज्ञान सिंह शाक्य ने गुरुवार को कोर्ट में प्रोटेस्ट फाइल किया। इसमें उन्होंने सबसे बडा बिंदु ये उठाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप और हत्या की बात कही गई है, जबकि दोबारा पोस्टमार्टम हुआ नहीं, ऐसे में सीबीआई ने किस जांच के आधार पर कह दिया कि किशोरियों ने आत्महत्या की है। पीडित पक्ष ने इसके अलावा सात और सवाल उठाए हैं, जिनके जवाब सीबीआई को देने होंगे, अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

इन बिंदुओं पर भी घिरेगी सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
. जून 2014 में दोनों बहनों की मौत के बाद राज्य की सीएफएसएल टीम को विशेषज्ञों के साथ मौके पर भेजा गया था। जांच के बाद सीएफएसएल टीम ने रिपोर्ट दी थी कि दोनों लड़कियों को मारने के बाद लटकाया गया। क्योंकि उनके मुंह से लार नहीं आ रही थी। अगर जिंदा लटकाया गया होता तो मुंह से लार आती। जबकि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया है कि दोनों लड़कियों ने पेड़ से लटककर खदुकशी की। यानि वह जिंदा पेड़ पर लटकीं।

. सीएफएसएल ने यह भी तर्क दिया था कि दोनों लड़कियों के नाखूनों में नीलापन नहीं है। एंटी मार्टम इंजरी में नाखूनों में नीलापन आ जाता है। जबकि मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक जब कोई फंदा लगाकर खुदकुशी करता है तो मौत की वजह एंटी मार्टम हैंगिंग आता है।

. यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आखिर लड़कियों के बालों में दूर बाग में स्थित यूकेलिप्टस के पेड़ की पत्तियां कैसे और कहां से आईं।

. एक साथ दोनों बहनों के खुदकुशी करने की बात घरवालों को हजम नहीं हो रही है
. पुलिस से लेकर सीबीआई के अफसर तक बयानों और जांच के बाद ऑनर किलिंग की बात कहते रहे। अचानक फाइनल रिपोर्ट में इतना विरोधाभास कैसे हो गया ?

. दोनों बहनों के दोबारा पोस्टमार्टम में सीबीआई द्वारा की गई हीलाहवाली और बाद में बाढ़ के चलते पोस्टमार्टम न हो पाने की वजह को लेकर भी कई सवाल उठेंगे।


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