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ब्लैक मनी पर नया कानून, 10 साल की जेल और संपत्ति की जब्ती


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नई दिल्ली,(एजेंसी) 01 मार्च । वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बजट में तमाम घोषणाओं के साथ नए कानूनों की भी बात की है। इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन के साथ काले धन पर नकेल कसने के लिए नए कानून का प्रावधान रखा है। बड़े बदलावों पर एक नजर…
काले धन के लिए कानून
1. काले धन पर नए कानून से जांच प्रक्रिया की नई संरचना तैयार होगी। इसके साथ ही प्राथमिकता के आधार पर विदेशों में जमा काले धन या अघोषित विदेशी संपत्तियों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

2. इसके जरिए विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय को छुपाने और कर चोरी पर 10 साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा 300 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया जाएगा। वहीं नए कानून के बाद दोषी को सेटलमेंट कमीशन के पास जाने की भी अनुमति नहीं होगी। अघोषित विदेशी संपत्ति से होने वाली आय पर अधिकतम दर से टैक्स लगेगा और कोई छूट या कटौती अगर लागू है, तो नहीं मिलेगी।

रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य
1. प्रस्तावित कानून के अनुसार अगर कोई संपत्ति या आय टैक्स के दायरे में नहीं भी आता हो तब भी इसका रिटर्न भरना अनिवार्य होगा साथ ही रिटर्न दाखिल करने वालों को विदेशी खाते के खुलने की तारीख को स्पष्ट रूप से रेखांकित करना होगा। रिटर्न ना भरने और विदेशी संपत्तियों के बारे में रिटर्न में विस्तार से जानकारी ना देना दंडनीय होगा और इसके लिए सात साल तक सजा हो सकती है।

2. कोई संस्था, बैंक, वित्तीय संस्थान और व्यक्ति अथवा उनके सहयोगी अभियोग और सजा के भागी होंगे।

3. यहां तक ​​कि रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए विदेशी मुद्रा की बिक्री और क्रॉस बॉर्डर लेन देन के बारे में तीसरे पक्ष की जानकारी प्रस्तुत करना भी आवश्यक हो जाएगा. लेन-देन के बंटवारे से निपटने के लिए भी यह प्रावधान बनाया जा रहा है।

अब अपराध होगा गलत जानकारी देना
1. प्रस्तावित कानून के बाद विदेशी संपत्ति पर गलत जानकारी देना या आय को छुपाना या कर चोरी, निर्दिष्ट अपराध होगा। इस स्थिति में यह कानून जांच एजेंसियों को विदेशों में जमा संपत्ति को जब्त करने, मुकदमा चलाने और भारत में स्थित बराबर मूल्य की संपत्ति को जब्त करने के लिए अधिकारियों को सक्षम बनाता है। इसको प्रभावी बनाने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002, और फॉरेन एक्सचेंज मैनेंजमेंट एक्ट में जरूरी संशोधन का भी प्रस्ताव है।

2. इस तरह के अपराध के लिए पीएमएलए के तहत भारत में बराबर संपत्ति की जब्ती के लिए संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए फेमा में एक विशेष प्रावधान, सेक्शन 37A जोड़ा जाएगा, यह भारत से बाहर जमा संपत्ति के मामले में सेक्शन 4 के उल्लंघन से जुड़ा है. प्रस्तावित कानून घरेलू स्तर पर जानकारी जुटाने के लिए नई संरचना को सामने रखता है साथ ही डाटा के एकीकरण और प्रभावी प्रवर्तन के लिए बयानों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग इसमें शामिल है। सीबीडीटी और सीबीएफसी जानकारी जुटाने और एक दूसरे से डाटाबेस साझा करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करेंगी।

घरेलू काला धन पर लगाम
घरेलू काला धन को रोकने के लिए, खास तौर पर रियल एस्टेट में. नए बेनामी लेन देन (प्रोहिबिशन) बिल का प्रस्ताव है, जो कि संस्थाओं को अभियोग चलाने और बेनामी संपत्ति को जब्त करने के लिए सक्षम बनाता है।

इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन
इनकम टैक्स एक्ट में भी बदलाव का प्रस्ताव है। एक्ट के सेक्शन 269एसएस और 269टी के प्रावधान में संशोधन प्रस्तावित है, ताकि रियल एस्टेट में 20 हजार से ज्यादा के नगद लेन देन को रोका जा सके। उल्लंघन की स्थिति में बराबर राशि का जुर्माना लगाया जाएगा। वही 1 लाख से ज्यादा की खरीददारी और संपत्ति की बिक्री पर पैन देना अनिवार्य हो गया है।


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