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होली की दस्तक : मिश्रित दृश्य


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मोहमद माज़ ख़ान व सुष्मिता दीक्षित
खबर इंडिया नेटवर्क/ लखनऊ व बाराबंकी, 5 मार्च 2015 । अचानक हुई बारिश की वजह से लखनऊ के लोगों के अंदर होली का उत्साह थोड़ा ठण्डा पड़ता नज़र आ रहा है। बारिश की वजह से मौसम तो ठण्डा हुआ ही साथ ही साथ जानलेवा बीमारी स्वाइन फ्लू के वायरस H1N1 को भी हवा मिल गई है।
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पुराने लखनऊ के रंगों के एक व्यापारी राजू ने बताया कि बारिश के कारण इस बार होली में बाज़ारों की रौनक भी फीकी है और पिछले साल के मुकाबले इस साल रंगों और पिचकारियों की बिक्री में काफ़ी गिरावट हुई है। जहाॅ एक तरफ़ बाज़ारों में सन्नाटा रहा वहीं दूसरी ओर मिठाई की दुकानों में ज़बरदस्त भीड़़ दिखी। लखनऊ की नामी दुकान राधे लाल मिष्ठान भंडार के मालिक जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी लोगों की पहली पसंद गुजिया ही है और गुजिया की कीमत 540रु प्रति किलो से ले कर 36000रु प्रति किलो तक है। दुकान चाहे छोटी हो या बड़ी हर दुकान में आपको भारी संख्या में लोग मिठाई खरीदते दिखाई देंगे।

मगर सवाल यह आता है कि क्या इस बार लोग सिर्फ मिठाई खा कर सूखी-सूखी होली मनाएंगे? जब लखनऊ के युवाओं से इस बारे में पूछा गया तो ग्रेजुएशन कर रहे एक छात्र सार्थक सिहं ने कहा कि होली साल में एक बार आती है और अगर मौसम की वजह से हम होली में रंग नहीं खेलेंगे तो होली बुरा मान जाएगी। वहीं दूसरे छात्र विनायक चैधरी ने कहा कि स्वाइन फ्लू से बचने के लिए हम मास्क लगा कर हाली खेलेंगे मगर खेलेंगे ज़रुर, दूसरी ओर किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की डा0 स्वस्तिका का कहना है कि वह इस बार स्वाइन फ्लू के कारण होली में रंग खेलने से परहेज़ करेंगी।
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बाराबंकी में होली के त्योहार का उल्लास बाजारों में खूब दिखा। चारों ओर भीड…कपड़ों से लेकर किराना की दुकानों तक पर भीड़ ही भीड़। होली पर नए कपड़ों को पहनने की परम्परा होती है। उस परम्परा के चलते कपड़ों की खरीददारी भी शबाब पर दिखी। होली के त्योहार पर बाजारों में चारों तरफ रौनक है। चारों तरफ अबीर गुलाल की दुकानें सजी है। मिठाई की दुकानों पर तरह-तरह के गिफ्ट पैक व कई वैराइटी की मिठाइयों को तैयार किया गया। कई दुकानों पर अलग-अलग प्रकार की गुझिया को तैयार किया गया है। कपड़ों की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ रही।
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बदलते मौसम का असर इस बार की होली के चिप्स और पापड़ पर ज्यादा पड़ता दिखाई दे रहा है। बिगड़ते हुए मौसम के कारण इस बार घरों में चिप्स पापड़ कम ही बन पाए हैं। जिसका असर बाजारों पर जोरों पर दिखा। दुकानदार रामेन्द्र का कहना है कि इस बार पहली बार ऐसा हुआ कि होली में चिप्स पापड़ इस कदर बिक रहे है। सबसे ज्यादा इस बार चायनीज चिप्स की खूब खरीदारी हुई। कपड़ों को लेकर बाज की जाए तो इस बार जीन्स की मांग सबसे ज्यादा है। नए कपड़ों को पहनने की परम्परा बाजार में खरीददारी में खूब दिखी। स्कूलों में गौर किया जाए तो बच्चों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली मनाई और एक दूसरे को बधाई दी। स्कूलों में छुट्टी होेते ही बच्चे होली के रंग में डूब गये। न ड्रेस खराब होने की चिंता और न ही मम्मी-पापा के नाराज होने का डर…। “होली है” कहते हुए बच्चों ने जमकर होली खेली। चाहे कुछ भी हो स्वाइन फ्लू या बारिश लोगों होली के उत्साह ने उनकी सारी चिन्ताओं को दूर कर दिया है।

होली में सावधानी बरतने की हिदायत
जैसे कि सब जानते हैं कि यह रंगों का त्योहार है। तरह-तरह की गुलाल, क्रिस्टल वाले रंग भी बिक रहे हैं। बाजार में यह रंग बिरंगे गुलाल सबको बहुत आकर्षित कर रहे हैं। लेकिन लोगों के मन में स्वाइन फ्लू और रंगों में मिलावट का डर भी है।

मिलावट रंगों पर लोगों का राय-
उपचिकित्साधिकारी डाॅ0 जी0सी0 वर्मा बाराबंकी सलाह देते हैं कि रंगों के त्योहार होली में सावधान रहने की जरूरत है। बाजार में ऐसे रंग, गुलाल व अबीर में बालू बिक रहे हैं जिनका प्रयोग सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। अबीर में बालू, क्रिस्टल के कण आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं तो रंगों में पड़े कैमिकल त्वचा को खराब कर देता है। हर साल होली मेें तमाम लोगों को ऐसे ही नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए पहले से ही सावधान रहेंगे तो तकलीफ नहीं झेलनी पड़ेगी।
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दुकानदार प्रखर बताते हैं कि होली के मौके पर रंगों की जमकर खरीददारी होती है। आप जानकर हैरान होंगे कि रंगों में 80 प्रतिशत केमिकल होता है। बाजार रासायनिक व नकली रंगों से पटा पड़ा है। इन रंगों के प्रयोग से त्वचा झुलस जाती है।

छात्रा अर्चना बाजपेयी कहती है कि इस बार होली उनके लिए उतनी अच्छी नहीं होगी जितनी हमेशा होती है। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू इस तरह से वातावरण में फेला है कि हमारा घर में ही रहना ठीक है।
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गृहणी रेखा श्रीवास्तव कहती है कि इस बार व अपन बच्चों को होली नहीं खेलने देगी। आसपास के लोगों में फेले स्वाइन फ्लू से वे अपने परिवार का बचाव करेंगे। इस बार की होली में बहुत सावधानी की जरूरत है।

जहाॅ एक ओर कुछ लोगों के अंदर होली को लेकर काफी उत्साह है वहीं दूसरी ओर कई लोग मौसम और स्वाइन फ्लू की वजह से होली खेलने से कतरा रहे हैं।

देखने वाली बात यह है कि क्या इस बार होली पर मौसम और स्वाइन फ्लू भारी पड़ेगा या नहीं।


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