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मूवी रिव्यू : हे ब्रो


नई दिल्ली,(एजेंसी) 08 मार्च । hey-bro

हमारी रेटिंग 1 / 5
पाठकों की रेटिंग 1.5 / 5
कलाकार : गणेश आचार्या, प्रेम चोपड़ा, मनिंदर सिंह, हनीफ हिलाल, नुपुर शर्मा निर्देशक अजय चंडोक
अवधि110

ऐसा लगता है जाने-माने कोरियॉग्राफर गणेश आचार्या को कैमरा फेस करने का कुछ ऐसा जुनून है कि अक्सर किसी गाने में खुद भी डांस करते नजर आ जाते हैं। वैसे इससे पहले बतौर डायरेक्टर गणेश फिल्म स्वामी बना चुके हैं जो स्क्रीन पर टोटली फ्लॉप साबित हुई, लेकिन डांस पर बनी फिल्म ‘एबीसीडी’ में प्रभुदेवा के साथ उनकी ऐक्टिंग को उनके फैंस ने जरूर सराहा। शायद फैंस से मिली इसी प्रशंसा का असर रहा कि इस बार उन्होंने अपनी फिल्म में खुद के लिए एक अहम किरदार चुना। अफसोस, गणेश ने उस सब्जेक्ट पर फिल्म बनाई जिस पर इससे पहले दर्जनों फिल्में बन चुकी हैं। अगर उन फिल्मों से इस फिल्म की तुलना की जाए तो गणेश की यह फिल्म पिछली फिल्मों के मुकाबले काफी कमजोर है। बतौर डायरेक्टर अजय चंडोक इस फिल्म से पहले 5-6 फिल्में बना चुके हैं। उनकी पिछली फिल्मों ने दर्शकों को निराश किया है, अब कुछ यही हाल ‘हे ब्रो’ का भी फिल्म है। इस फिल्म को देखने के बाद ताज्जुब होता है कि बतौर प्रडयूसर गणेश को इस कहानी में ऐसा क्या नजर आया कि उन्होंने इस कहानी पर अपने दमखम पर फिल्म बनाने का फैसला किया।

‘कहानी : गोपी (गणेश आचार्या) राजस्थान के एक छोटे गांव में अपने दादाजी (प्रेम चोपड़ा) के साथ रहता है। एक दिन दादाजी गोपी को बताते हैं कि उसका एक और जुड़वा भाई भी है, जो गोपी के मां-बाप के बीच हुए तलाक के बाद अपनी मां के साथ मुंबई चला गया था। यही वजह है, गोपी ने अपने जुड़वा भाई का कभी चेहरा तक नहीं देखा था, इसके बावजूद गोपी मुंबई जाकर अपनी मां और भाई की तलाश में लग जाता है। गोपी के पास अपने भाई की तस्वीर तक नहीं है, ऐसे में गोपी यही समझता है कि उसके जुडवा भाई की शक्ल भी उसकी शक्ल जैसी होगी। यही वजह है कि गोपी हर जगह अपनी ही तस्वीर लेकर सभी से अपने भाई के बारे में पूछता फिरता रहता है, उसे यहीं लगता है सभी जुड़वां लोगों की शक्लें एक जैसी होती हैं। मुंबई में एक दिन गोपी की मुलाकात इंस्पेक्टर शिव (मनिंदर सिंह) से होती है। अक्सर शिव और गोपी की किसी न किसी बात को लेकर झड़प भी हो जाती है। यहीं गोपी का सामना माफिया गैंग के हेड बाबा (हनीफ हिलाल) से भी होता है।

ऐक्टिंग : गणेश आचार्य और मनिदंर सिंह के बीच की केमिस्ट्री कुछ सीन्स में देखते ही बनती है। दादा जी के रोल में प्रेम चोपड़ा खूब जमे हैं। बाकी बचे कलाकारों ने बस किसी तरह से कैमरे के सामने अपने किरदार को निभा भर दिया।

डायरेक्शन : बतौर निर्देशक अजय किसी भी फील्ड में प्रभावित नहीं कर पाते, न तो उनकी कहानी ओर न ही किरदारों पर कोई पकड़ है। दो घंटे से कम अवधि की फिल्म में भी आप बोरियत महसूस करें तो इस डायरेक्टर की नाकामी ही कहा जाएगा।

क्यों देंखे : पूरी फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, रितिक रौशन, अक्षय कुमार, अजय देवगन, प्रभु देवा पर फिल्माया गाना बिरजू ऐसा सुखद क्षण है, जिसे आप इंजॉय करते हैं। अपने कई पसंदीदा स्टार्स को एक साथ थिरकता देखना चाहते हैं तो इस फिल्म को देखने जाएं वर्ना हम तो यही कहेंगे टीवी पर किसी पसंदीदा कार्यक्रम देखकर टिकट के पैसे बचाइए और फैमिली के साथ इंजॉय करें।


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