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चिदंबरम ने कांग्रेस की हार का ठीकरा प्रणव मुखर्जी पर फोडा


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नई दिल्ली,(एजेंसी) 08 मार्च । पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए गठबंधन की 2014 के आम चुनाव में हार 2008-09 में सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन पैकेज के कारण हुई। इस प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा सरकार ने ग्लोबल मंदी से निपटने के लिए इकनॉमी को गति देने के लिए की थी। तब प्रणव मुखर्जी वित्त मंत्री थे। चिदंबरम ने कहा कि पैकेज के जरिए सरकार ने फिस्कल कन्सोलिडेशन नॉर्म्स का उल्लंघन किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच गई।

चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे तब उन्होंने राज्यसभा में कहा था,घरेलू समस्याओं के कारण इंडियन इकॉनमी की स्थिति नाजुक है। हम राजकोषीय घाटे को प्रश्रय दे रहे हैं और करंट अकाउंट घाटे को भी जगह दे रहे हैं। राजकोषीय घाटे में और करंट अकाउंट घाटे में बढोतरी 2009 से 2011 के बीच लिए गए कुछ खास फैसलों के कारण हो रही है। इसके बाद चिदंबरम ने लोकसभा में कहा था,जब मैंने वित्त मंत्रालय की कमान संभाली तब मुझे पता था कि बेहद मुश्किल राह है। राजकोषीय घाटे की सीमा का उल्लंघन किया गया था। यहां तक कि बजट का अनुमान भी गडबड था। करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति और बदतर थी। चिदंबरम ने कहा, प्रोत्साहन पैकेज का नतीजा यह हुआ कि सरकार करंट अकाउंट डेफिसिट, रेवेन्यू डेफिसिट और फिस्कल डेफिसिट के टारगेट से पीछे छूटती गई। इन सारी वजहों से महंगाई दर 14 पसेंüट पर पहुंच गई। इतनी जबर्दस्त महंगाई के कारण जनता यूपीए के खिलाफ गई।

जेटली के बजट का विश्लेषण…

वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा पेश किए गए आम बजट का चिदंबरम विश्लेषण कर रहे थे। चिदंबरम ने कहा,जेटली का बजट इç`टी और फिस्कल कन्सोलिडेशन के मोर्चे पर नाकाम दिख रहा है। मेरी सरकार को 2014 के आम चुनाव में इसलिए सजा मिली क्योंकि हमने 2009 में प्रोत्साहन पैकेज के रूप में ज्यादा रूपए खर्चे थे। हमने फिस्कल कन्सोलिडेशन नॉर्म्स का उल्लंघन किया और महंगाई दर 14 पसेंüट तक पहुंच गई थी। रूपए की कीमत लगातार गिरती गई। अंतत: जनता ने हमें खारिज कर दिया और हमारी सरकार चुनाव हार गई। चिदंबरम ने यह बात चैन्नई के लोयला इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनस ऎडमिनिस्ट्रेशन में कही।

चिदंबरम ने कहा, दिसंबर 2008 में एक प्रोत्साहन के जरिए योजनागत खर्च की व्यवस्था की गई। सरकार ने अतिरिक्त 20,000 करोड रूपए की अनुमति योजनागत खर्च के रूप में दी। इसके साथ ही 3 लाख करोड रूपए टैक्स में कटौती और रिजर्व बैंक द्वारा अहम दरों में की गई कमी में लगा दिए गए। इन प्रोत्साहन पैकेजों का नतीजा यह हुआ कि महंगाई और बढ गई। करंट अकाउंट डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट की पतली हालत के बाद फिस्कल डेफिसिट 3.5 पसेंüट से आगे निकल गया। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा,इसके बाद सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 3.6पसेंüट से भी नीचे रखा। इसके लिए विजय एल केलकर की अध्यक्षता में पैनल बना। सरकार ने इस पैनल द्वारा 2012 में सौंपी गई सिफारिशों को कुबूल किया।

रिपोर्ट में बताया गया कि यदि खास कदम उठाया जाता है तो घाटा 2016-17 में सकल घरेलू उत्पाद के 3पसेंüट से नीचे आ जाएगा। चिदंबरम ने कहा, लेकिन जेटली ने 2017-18 की नई डेडलाइन रखी है। यह यूपीए सरकार द्वारा 2015-16 के लिए 3.6 पसेंüट फिस्कल डेफिसिट के टारगेट के मुकाबले है। उन्होंने जीडीपी के 3.9पसेंüट तक की छूट दी है। एनडीए शासन एक अतिरिक्त 42,500 करोड रूपये उधार लेने की योजना बना रहा था। एनडीए सरकार खास रूप से बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक खर्च को बढाने के लिए इस राह का उपयोग करने की योजना बना रही है। पेंशन फंड के रूप में इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में पैसे का लाभ उठाने का लक्ष्य निर्धारित कर रही है लेकिन इस पैसे का उपयोग योजनागत खर्च में नहीं होने जा रहा। ये सारे पैसे गैर-योजना खर्च में जाएंगे। 2014-15 के लिए योजनागत खर्च 4.67 लाख करोड से नीचे है और अगले साल के लिए 4.65 लाख करोड है।


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