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मसरत की रिहाई पर केंद्र से नहीं हुई थी बात: मोदी


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नई दिल्ली,(एजेंसी) 09 मार्च । जम्मू-कश्मीर में अलगावादी नेता मसरत आलम की रिहाई के मुद्दे पर विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। लोकसभा में इस मुद्दे पर बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा विपक्ष को आलोचना का हक है और देश में जो आक्रोश है उसमें एक स्वर मेरा भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी भी हरकत पर आक्रोश जताना उचित है। हालांकि, अपने बयान में पीएम ने यह भी कहा कि हमें देशभक्ति की सीख न दें, हमने कश्मीर के लिए अपने नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान है। उनकी इस बात पर विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे।

पीएम से पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को जम्मू-कश्मीर गृह विभाग से मसरत आलम की रिहाई के बारे में मिली रिपोर्ट की जानकारी दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है और कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। राजनाथ सिंह ने अपना बयान संसद के ऊपर सदन राज्यसभा में भी दोहराया।

सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, आरजेडी और जेडी (यू) सदस्यों ने प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए भारी हंगामा किया, जिसके कारण बैठक करीब सवा 11 बजे 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। एनडीए सरकार ने इसे गंभीर मसला बताया और इससे दूरी बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से सलाह नहीं ली थी। साढ़े 11 बजे सदन की बैठक फिर से शुरू होने पर विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री के बयान की मांग करने लगे। नायडू ने एक बार फिर से सदस्यों को आश्वस्त किया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह 12 बजे सदन में आकर बयान देंगे और प्रधानमंत्री भी सदन में मौजूद रहेंगे तथा जरूरत पड़ी तो वह हस्तक्षेप करेंगे। इसके बाद विपक्षी सदस्य शांत हुए और प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा, ‘सदन के कई सम्मानित सदस्यों ने अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर चिंता जताई है। जैसे ही हमें उसकी रिहाई की जानकारी मिली हमने जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी। यह रिपोर्ट हमें मिल चुकी है। पूरे सदन को इस मामले में आश्वस्त करना चाहता हूं कि जब भी देश या जनता की सुरक्षा का सवाल उठेगा उस बारे में हम कोई समझौता नहीं करेगा।’ गृह मंत्री ने कहा कि जो भी जानकारी हमें जम्मू-कश्मीर गृह विभाग से मिली है, उसके बारे में सदन को जानकारी देने चाहता हूं।

राजनाथ सिंह राज्य सरकार से मिली जानकारी के आधार पर बताया, ‘मसरत ने 2010 में घाटी में हुए उग्र प्रदर्शनों में मुख्य भूमिका निभाई थी। 1995 से लेकर अब तक उस पर 27 मामले दर्ज किए गए जिनमें देशद्रोह, हत्या का प्रयास और साजिश रचने के मामले हैं। विभाग का कहना है कि सभी 27 मामलों में उसे कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। फरवरी 2010 से पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत उसे 8 बार हिरासत में लिया जा चुका है। हाई कोर्ट का कहना है कि किसी एक शख्स को एक ही आरोप में दो साल से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकते हैं। हम गृह विभाग के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सदन अगर चाहेगा तो स्पष्टीकरण मिलने के बाद उस बारे में भी सूचित किया जाएगा।’

इस मामले में दखल देते हुए पीएम ने कहा, ‘देश में जो आक्रोश है, उस आक्रोश के स्वर में मेरा भी स्वर है। इस तरह की किसी भी हरकत पर आक्रोश जताना उचित है। देश अलगाववाद के मुद्दे पर दलबंदी के आधार पर न पहले कभी सोचता था , न अब सोचता है और न कभी आगे सोचेगा।’ उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के बाद वहां जो भी हो रहा है उसकी भारत सरकार को जानकारी नहीं है। इस बारे में केंद्र सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई है। हमें ऐसी कोई हरकत स्वीकार नहीं। हमने कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है और जैसा कि गृहमंत्री ने बताया कि स्पष्टीकरण आने के बाद सदन को सूचित किया जाएगा।’

प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे पर कहा, ‘समय आने पर अवश्य राजनीतिक टिप्पणियां करें। बीजेपी वहां सरकार में हिस्सेदार है और आप उसकी भरपूर आलोचना करें, होनी भी चाहिए लेकिन ऐसा करते समय देश की एकता के संबंध में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि हमारे भिन्न स्वर हैं। ऐसा संदेश न देश में , न दुनिया में और न कश्मीर में जाना चाहिए।’ विपक्ष द्वारा हंगामा जारी रहने पर उन्होंने कहा, ‘यह पूछा जा रहा है कि मोदी जी चुप क्यों हैं? ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें इस मुद्दे पर चुप रहना पड़े हम वो लोग हैं जिन्होंने इन आदर्शों के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिया है, इसलिए कृपया करके हमें देशभक्ति न सिखाएं।’

इससे पहले आसन के समक्ष सदस्यों की नारेबाजी के बीच संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, ‘यह बेहद गंभीर मामला है और पूरे देश से जुड़ा हुआ है। यह किसी एक पार्टी से जुडा मामला नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘जहां तक सरकार का सवाल है, केंद्र सरकार से सलाह नहीं की गई।’ लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इस मसले पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करने वाले कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे, दीपेन्द्र सिंह हुड्डा और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय को आश्वासन दिया कि वह 12 बजे सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका देंगी।

राज्यसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमारी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘जहां तक एक शख्स की रिहाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो केंद्र सरकार ने इस बारे में जम्मू-कश्मीर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। प्रारंभिक रिपोर्ट आई है और इस बारे में गृहमंत्री सदन में बयान देंगे।’ इसके बाद मोदी से जवाब की मांग कर रहे कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक आज करीब 20 मिनट के लिए दोपहर 12 बजे तक स्थगित हो गई।

इससे पहले कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके लिए उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के आने के एक हफ्ते के भीतर ही अलगाववादी तत्वों की गतिविधियां बढ़ गई हैं और वे जलसे कर राष्ट्रविरोधी बयान दे रहे हैं। शर्मा ने कहा कि अब राज्य की सरकार ने एक अलगाववादी को रिहा किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राज्य नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा का विषय है।

शर्मा ने कहा कि पीडीपी नेता कह रहे हैं कि इस अलगाववादी को न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि दो पार्टियों द्वारा सरकार चलाने के लिए बनाई गई सीएमपी से विदेश नीति तय नहीं हो सकती। कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में पीडीपी-बीजेपी सरकार के शपथ लेने के समय प्रधानमंत्री भी गए थे और केंद्र सरकार मुद्दे से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है।

पीडीपी के मीर मोहम्मद फैयाज ने इस मुद्दे को इस समय उठाने के लिए आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उस समय एक भी शब्द नहीं बोला था, जब 2002 में पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और यासीन मलिक जैसे हुर्रियत नेताओं को छोड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में आने के लिए सिद्धांतों से समझौता किया क्योंकि पांच कांग्रेस विधायकों ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाए जाने के मामले में पीडीपी के समान विचार व्यक्त किए थे।

आजाद ने पीडीपी सदस्य के इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस के तीन-चार विधायकों ने पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता और अब राज्य सरकार के एक मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि मानवता के आधार पर अफजल के परिजनों को उससे मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए थी और उसका शव सौंपा जाना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेसस विधायकों ने अफजल की फांसी के बारे में कुछ नहीं कहा था उन्होंने फांसी की भर्त्सना नहीं की थी।


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