Monday , 21 January 2019
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इतनी आसान नहीं है महागठबंधन की राह, एक सांसद वाली पार्टी ने मांगी 5 सीटें


 उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ बन रहे गैर महागठबंधनमें पेंच फंसता दिख रहा है. अजित सिंह पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) ने महागठबंधन में सम्मानजक सीटों की मांग रख दी है. सूत्रों का कहना है कि RLD ने यूपी में महागठबंधन में 5 सीटों की मांग की है. किसानों के बीच अच्छी पकड़ रखने वाली RLD ने मुज़फ्फरनगर, बागपत, मथुरा, अमरोहा समेत 5 सीटें मांगी हैं. माना जा रहा है कि 15 जनवरी के बाद उत्तर प्रदेश में महागठबंधन का ऐलान किया जाएगा.

सूत्रों के हवाले से खबरें आईं थी कि महागठबंधन में तय हुआ है कि सपा और बसपा 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए छोड़ दी जाएगी. बाकी की 4 सीटें सहयोगी दलों को दी जाएंगी. वहीं आरएलडी अकेले 5 सीटें मांग रही है, ऐसे में महागठबंधन में पेंच फंस सकता है.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी को करारी शिकस्त मिली थी. खुद पार्टी अध्यक्ष अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी चुनाव हार गए थे. हालांकि साल 2018 में कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा और बसपा के सहयोग से आरएलडी के प्रत्याशी तबस्सुम हसन को जीत मिली थी. यानी इस वक्त लोकसभा में आरएलडी के एक मात्र सांसद हैं. इसके अलावा 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी आरएलडी के एक मात्र विधायक जीत पाए थे.

मालूम हो कि गैर कांग्रेसी गठबंधन की कवायद के बीच मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. इस मुलाकात में सीटों के बंटवारे पर कोई बात हुई या नहीं इस पर चौधरी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

सपा कार्यालय में मंगलवार को अखिलेश से मुलाकात के बाद रालोद उपाध्यक्ष ने कहा, ‘अखिलेश के साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई, आगे क्या होना चाहियें इस पर भी चर्चा हुई.’ उनसे पूछा गया कि क्या गठबंधन में रालोद को मिलने वाली सीटों पर भी चर्चा हुई इस सवाल को उन्होंने टालते हुये कहा ‘सीटों की बेचैनी मीडिया को है, सारी बाते साफ होंगी, सस्पेंस बनायें रखे.’’ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ किसी भी गठबंधन के सवाल को वह टाल गये.

केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर अगड़ों को आरक्षण दिये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘भाजपा का एजेंडा रहता है कि मुद्दों को छोड़ दें, हल न निकालें, कोई भी घोषणा का क्रियान्वयन नहीं होता है केवल शगूफा छोड़ दिया जाता है.’ 

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच हुए गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल का भी अहम हिस्सा है, पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच मुलाकात हुई थी, जिसमें सीटों के बंटवारे को लेकर खबरें आम हुई थीं. इसमें राष्ट्रीय लोकदल को गठबंधन में दो से तीन सीटें दिए जाने की बात सामने आई थीं लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी.


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