Monday , 21 January 2019
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पाकिस्तान सरकार का फैसला, गाय के साथ होगा ये अनूठा प्रयोग


 हमारे देश में गाय को लेकर हमेशा राजनीती चलती रहती है। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान ने गाय के साथ अनूठा प्रयोग किया है। पाकिस्तान में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में हर साल लगभग 22 प्रतिशत मौतें जहरीली हवा की वजह से हो रही हैं। अब इसे देखते हुए वहां की सरकार ने देश में गाय के गोबर से बसें चलाने का फैसला लिया है। फिलहाल ये ग्रीन बसें कराची में शुरू की जाएंगी।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में हर साल 4 मिलियन से भी ज्यादा लोगों की वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियों से मौत हो जाती है। रिपोर्ट में जिन देशों के नाम सबसे ऊपर हैं उनमें पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी शामिल है। यहां वायु प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक है कि हर साल 3 नवंबर से 31 दिसंबर तक का वक्त स्मॉग सीजन घोषित किया जाने लगा है और इस दौरान ईंट भट्ठियां बंद रहने से लेकर तमाम ऐहतियात बरते जा रहे हैं ताकि पूरे मुल्क का दम न घुट जाए।

इन बसों को ग्रीन बस रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क के नाम से जाना जा रहा है जो गाय के गोबर यानी बायो मीथेन गैस से चलेंगी। आईजीसीएफ के अनुसार देश में 4 लाख से भी ज्यादा गाय-भैंस हैं। नेटवर्क की मदद से इनका गोबर इकट्ठा कर उससे बायोगैस प्लांट में मीथेन बनाई जाएगी और फिर बसों को सप्लाई होगी।

इस अनूठे प्रोजेक्ट से न केवल पाकिस्तान की हवा साफ होगी, बल्कि ये जल प्रदूषण को भी कम करने में मददगार साबित होने जा रहा है। बता दें कि दुधारू पशुओं का मल-मूत्र नदियों के जरिए समुद्र तक पहुंच जाता है और पानी का स्त्रोत लगातार गंदा होता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हर दिन लगभग 3,200 टन गोबर और मूत्र समुद्र में बहा दिए जाते हैं। यहां तक कि इसे बहाने और साफ-सफाई के लिए भी 50 हजार गैलन से ज्यादा पानी बर्बाद होता है।

इंटरनेशनल ग्रीन क्लाइमेट फंड (आईजीसीएफ) की मदद से पाक सरकार ने ये कदम उठाने का फैसला लिया है। योजना है कि अगले ही साल कराची और फिर जल्द ही लाहौर, मुल्तान, पेशावर और फैसलाबाद जैसे शहरों की सड़कों पर जीरो प्रतिशत प्रदूषण वाली ग्रीन बसें दौड़ने लगेंगी। फिलहाल केवल कराची में ही 200 बसें सड़कों पर उतारी जाने वाली हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत तकरीबन 583 मिलियन डॉलर है, जिसमें से लगभग 49 मिलियन डॉलर द ग्रीन क्लाइमेट फंड दे रहा है। ये संगठन अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो प्रदूषण कम करने में देशों की फंडिंग और योजनाओं की बाबत मदद करता है।


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