Wednesday , 2 December 2020
Home >> Breaking News >> जमीन बिल पर सोनिया और अन्ना के विरोध पर सरकार का जवाब, गडकरी ने दी खुली बहस की चुनौती

जमीन बिल पर सोनिया और अन्ना के विरोध पर सरकार का जवाब, गडकरी ने दी खुली बहस की चुनौती


nitin-gadkari-b2 (1)
नई दिल्ली,(एजेंसी) 19 मार्च । परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जमीन बिल पर सोनिया गांधी और अन्ना हजारे को खुली बहस की चुनौती दी है। भूमि अधिग्रहण विधेयक को राजनीतिक रंग नहीं देने का आग्रह करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्ना हजारे सहित विभिन्न नेताओं को किसी भी मंच पर खुली चर्चा के लिए पत्र लिखा है और राष्ट्रहित में इसे पारित कराने में सहयोग मांगा है।

गडकरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ इस विषय पर सोनिया गांधी, अन्ना हजारे समेत विभिन्न नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को किसी भी मंच पर खुली चर्चा के लिए पत्र लिखा है क्योंकि इस विधेयक के बारे में जो बातें कही जा रही हैं वह जमीनी हकीकत से परे है और इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक के पारित होने पर अधिक से अधिक रोजगार सृजित किया जा सकेगा, सिंचाई के साधन विकसित होंगे, सड़क सम्पर्क बढेगा, स्कूल और अस्पताल खुल सकेंगे। इसके तहत 80 प्रतिशत अधिग्रहण तो सिर्फ सिंचाई के लिए होगा। सिंचाई के साधन बढ़ेंगे तो खाद्यान्न उत्पादन बढेगा।

गडकरी ने दावा किया कि संप्रग सरकार ने जो कानून बनाया था उसमें 13 ऐसे कानून थे जो इसके दायरे में नहीं थे जिसमें कोयला, रेलवे से जुड़े मामले शामिल हैं। हमने इसमें ग्रामीण आधारभूत संरचना, रक्षा के साथ औद्योगिक कारिडोर जोड़ा है।

उन्होंने कहा कि इसलिए यह कहना गलत है कि यह किसान विरोधी है बल्कि इसमें तो किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष ध्यान रखा गया है और भूमि अधिग्रहण का मुआवजा बढाकर चार गुणा किया गया है।

गडकरी ने कहा, ‘‘ हम विपक्ष और सामाजिक कार्याकर्ता अन्ना हजारे एवं अन्य लोगों से कहते हैं कि आप किसी भी मंच पर आएं, चाहे इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया या कोई अन्य मंच हो, हम खुली चर्चा करने को तैयार है। इस बारे में खुली चर्चा हो जाए। ’’

गडकरी ने कहा, हम विपक्षी दलों से आग्रह करते हैं कि वे भूमि विधेयक का राजनीतिकरण नहीं करें। उन्होंने दावा किया कि यह किसी भी रूप में किसान विरोधी नहीं है, उल्टा यह किसान की प्रगति और विकास में सहायक है।
sonia gadkari
उल्लेखनीय है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के अल्पमत में होने के कारण उसे कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। यह विधेयक लोकसभा में नौ संशोधनों के साथ पारित हुआ लेकिन भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना ने मतविभाजन में हिस्सा नहीं लिया था।

विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में 14 दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च करके राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखी। भारतीय किसान यूनियन समेत कई किसान संगठनों ने इस विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से मांग की कि भूमि अधिग्रहण से पहले शत प्रतिशत किसानों की मंजूरी ली जानी चाहिए।


Check Also

सीएम पिनाराई विजयन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है केरल की राजनीति

विपक्ष ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार के नेतृत्व और सत्तारूढ़ दल को चुनौती देने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *