Saturday , 20 April 2019
खास खबर
Home >> Politics >> मायावती ने बसपा शासन में मूर्तियों के साथ ही पार्क निर्माण में खर्च पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर मीडिया को सलाह दी

मायावती ने बसपा शासन में मूर्तियों के साथ ही पार्क निर्माण में खर्च पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर मीडिया को सलाह दी


 बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने बसपा शासन में मूर्तियों के साथ ही पार्क निर्माण में खर्च पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर मीडिया को सलाह दी है। उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने मीडिया से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश न करे।

मायावती के शासन में उत्तर प्रदेश में स्मारक व पार्क में अनाप-शनाप खर्च पर कल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि बसपा मुखिया के कार्यकाल में प्रथम दृष्टया मूर्तियों, स्मारक और पार्कों पर खर्च हुए पब्लिक मनी को सरकारी कोष में लौटना चाहिए। अब इस मामले में अगली सुनवाई दो अप्रैल को होगी।

बसपा शासनकाल में मूर्तियों, स्मारक और पार्कों पर खर्च हुए को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश ना करें। मायावती ने यह मांग अपने ट्विटर अकाउंट से की है।

मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मीडिया कृपया करके माननीय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश ना करे। माननीय न्यायालय में अपना पक्ष जरूर पूरी मजबूती के साथ आगे भी रखा जाएगा। हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में भी माननीय न्यायालय से पूरा इंसाफ मिलेगा। मीडिया व भाजपा के लोग कटी पतंग ना बनें तो बेहतर है।

मायावती ने भाजपा को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के लोग कटी पतंग ना बनें तो बेहतर है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस ट्वीट के बाद एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि सदियों से तिरस्कृत दलित व पिछड़े वर्ग में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान में निर्मित भव्य स्थल, स्मारक, पार्क आदि उत्तर प्रदेश की नई शान, पहचान व व्यस्त पर्यटन स्थल हैं। जिसके आकर्षण से सरकार को नियमित आय भी होती है।

मूर्तियों के निर्माण से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान कल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी राय है कि मूर्तियों पर खर्च पैसे को मायावती सरकारी कोष में जमा करवाना चाहिए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि प्रथम दृष्टया मूर्तियों, स्मारक और पार्कों पर खर्च हुए पब्लिक मनी को मायावती को सरकारी कोष में लौटना चाहिए। 


Study Mass Comm