Tuesday , 19 February 2019
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अभी वाम व कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर किसी तरह के गठबंधन का औपचारिक एलान नहीं हुआ


अभी वाम व कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर किसी तरह के गठबंधन का औपचारिक एलान नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों खेमों के नेताओं ने म्यान से तलवारें निकाली ली है। यहां बात हो रही है रायगंज लोकसभा सीट की। यदि कांग्रेस और वाम मोर्चा में चुनाव एक साथ लड़ने की सहमति बनी तो जाहिर सी बात है कि सिटिंग-गेटिंग फार्मूला के तहत सांसद मो. सलीम टिकट के मामले में बीस पड़ेंगे। पर, पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुकीं दीपा दासमुंशी किसी कीमत पर यह सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। 


   उनका कहना है कि वे अपनी दावेदारी को मो. सलीम के लिए कुर्बान नहीं करेंगीं। उनकी महत्वाकांक्षा इसलिए भी परवान चढ़ रही है, क्योंकि कांग्रेस की जिला इकाई उनके साथ है। उधर वाम फ्रंट द्वारा भी एलान कर दिया गया है कि मो. सलीम ही इस बार भी प्रत्याशी होंगे। जिला कांग्रेस कमिटि ने स्पष्ट कर दिया है कि रायगंज लोक सभा सीट से दीपा दासमुंशी ही चुनाव लड़ेगी। 
   गौरतलब है कि उत्तर दिनाजपुर जिला में कांग्रेस को अस्तित्व में लाने का श्रेय एकमात्र नेता स्व. प्रियरंजन दासमुंशी को जाता है। वे भूमिपुत्र के नाम से विख्यात थे। उनकी ही बदौलत उत्तर दिनाजपुर जिला कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। उनकी अनुपस्थिति में यह जिम्मेदारी उनकी धर्मपत्नी दीपा दासमुंशी बखूबी निभा रही हैं। 
   विगत लोकसभा चुनाव में वे रायगंज सीट से मामूली मतों से पराजित हुई थीं। यही कारण है कि कांग्रेस उनको सबसे प्रबल दावेदार मान रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं रायगंज के विधायक मोहित सेनगुप्त ने कुछ दिन पहले विभिन्न सभाओं में एलान कर दिया कि दीपा देवी ही पार्टी की एक मात्र उमीदवार हैं। इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने अघोषित प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया। इस बीच मौसम नूर ने तृकां का दामन थाम लिया और मालदा उत्तर लोक सभा सीट से दीपा दासमुंसी को मौसम के विरुद्ध उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठने लगी। सूत्रों की मानें तो यह मामला पार्टी के राज्य नेतृत्व के पास भेजा गया है। चूंकि यह निर्णय अलाकमान को लेना है इसलिए राज्य नेतृत्व कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। 
   पार्टी के जिला सचिव पवित्र चंद ने जागरण को बताया कि मौसम के पार्टी बदल करने के बाद वहां के कार्यकर्ता सबक सिखाने के मूड में हैं। दीपा देवी की लोकप्रियता को देखते हुए उनके प्रति आस्था लाजमी है। लेकिन उत्तर दिनाजपुर जिला के पार्टी कार्यकर्ताओं के मन में उनके प्रति अटूट भरोसा है। इसलिए रायगंज सीट से दीपा दासमुंशी की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। 
   उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वाम दल के साथ यदि कोई समझौता होता भी है तो मो. सलीम के लिए कहीं दूसरी सीट दी जाएगी। यह बात वाममोर्चा के लिए असहज लगी और अपनी प्रतिक्रिया देते हुए माकपा व वाममोर्चा के जिला सचिव अपूर्व पाल ने कहा कि मो. सलीम रायगंज के सांसद हैं और वे ही इस लोकसभा चुनाव में वाममोर्चा के उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस के साथ समझौता होने की स्थिति में भी इस सीट को छोडऩे का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विगत चुनाव में वाममोर्चा अपने दम पर लड़ा था और जीता भी था। आगे भी मोर्चा की रणनीति को लेकर कोई संशय नहीं है।  


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