Tuesday , 19 February 2019
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ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। यहां न डॉक्टर काम करना चाहते हैं और न ही फार्मासिस्ट


ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। यहां न डॉक्टर काम करना चाहते हैं और न ही फार्मासिस्ट। हाल यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर डॉक्टर मिलते नहीं। मरीजों को दवाएं देने बजाय फेंक दी जा रहीं हैं। रविवार को चौबेपुर सीएचसी से दो सौ मीटर दूर झाड़ियों में भारी मात्रा में सरकारी दवाएं पड़ीं मिलीं। इसमें बहुत सारी दवाओं की एक्सपायरी डेट अभी बाकी है। इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं। 


कुछ दिन पहले मंधना-बिठूर-गंगा बैराज मार्ग पर बैकुण्ठ पुर गांव के पास भारी मात्रा में आयरन की गोलियां फेंकी मिलीं थीं। इस मामले में किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को चौबेपुर सीएचसी से कुछ दूर हृदयपुर गांव के पास भारी मात्रा में जेंटामाइसिन इंजेक्शन, एलकालाजर सीरज, फोलिक एसिड व पैरासिटामॉल सीरप सहित विटामिन के पैकेट पड़े मिले। दवाओं के पैकेट एवं इंजेक्शन झाडि़यों में बिखरे थे। रास्ते से गुजर रहे ग्रामीणों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। इस पर सीएचसी प्रभारी सक्रिय हुए। जांच में पाया गया कि इसमें बहुत सारी दवाओं की एक्सपायरी डेट अभी बची हुई है। 


सीएचसी प्रभारी धर्मेद्र सिंह ने बताया कि दवाओं को एकत्र कर बैंच नंबर से स्टॉक का मिलान कराया जा रहा है। एएनएम एवं आशा द्वारा दवाएं फेके जाने की आशंका है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। दवाओं को नष्ट करने का प्रावधान दवा एक्सपायर होने पर तिथि के 120 दिन के अंदर कंपनी वापस ले लेती है। निर्धारित अवधि में दवा वापस न लेने पर नष्ट करने का प्रावधान है। दवाओं को खुले में फेंकना और जलाना प्रदूषण नियम की धारा 7 का उल्लंघन हैं। एसीएमओ को जांच के आदेश घटना से नाराज सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने सख्त रूख अपनाते हुए एसीएमओ को जांच के आदेश दिए हैं।


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