Tuesday , 19 February 2019
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मांसपेशियां भी हो जाती जख्मी, वाइब्रेटर से कुछ देर के लिए पैदा होती सनसनी पर नहीं मिलता कोई लाभ


बार्बर शॉप में मसाज का पल भर आराम जिंदगी भर का ‘बड़ा दर्दÓ दे सकता है। गलत तरह से मसाज करने पर न सिर्फ नसें प्रभावित होती हैं, बल्कि मांसपेशियां भी जख्मी हो जाती हैं। वाइब्रेटर से महज कुछ देर के लिए शरीर में सनसनी पैदा होती है। इसका कोई लाभदायक परिणाम नहीं है। यह जानकारी ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट के महासचिव डॉ. जी सुधाकरण ने दी। वह शनिवार को लाजपत भवन में आयोजित एसोसिएशन के 19वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मसाज से अच्छा महसूस होना साइकोलॉजिकल है। इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। सर्जरी, मेडिसिन, आर्थो, गाइनी, पीडियाट्रिक आदि विभाग भी इलाज का हिस्सा मान रहे हैं।

युवाओं में बढ़ी दिक्कत 

अध्यक्ष डॉ. आरपीएस राणा ने बताया कि पहले कमर, गर्दन और कंधों में दर्द आदि की दिक्कत 50 साल के बाद आरंभ होती थी। अब 20 साल के युवा को भी समस्या होने लगी है। इसकी वजह लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठना, अनियमित जीवनशैली, सड़कों पर गड्ढे हैं।

चंद मिनटों में मांसपेशियों का खिंचाव दूर 

देहरादून से आए डॉ. अरुण मोझी रंगनाथन ने मायो फेशियल रिलीज तकनीक का सजीव मंचन किया। उन्होंने स्टेज पर ही मांसपेशी की तकलीफ लेकर आए युवक के दर्द को दूर करने का दावा किया। डॉ. के मुताबिक यह यूके की तकनीक है।

फिजियोथेरेपी में आई नई तकनीक 

पटियाला से आए डॉ. संदीप सूद के मुताबिक पिछले 15 साल में फिजियोथेरेपी में काफी बदलाव आया है। कई नई तकनीक आ गई हैं,जो रोग को दूर करने में कारगर हैं। यूएसए और चीन की तकनीक भी इस्तेमाल हो रही है।

जागरूक हो रहे लोग 

उपाध्यक्ष डॉ. वीके खोखर ने बताया कि लोग भी जागरूक हो गए हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना भी फिजियोथेरेपी के लिए आ रहे हैं। डॉक्टर भी सर्जरी के बाद इसका परामर्श देते हैं।

नए तरह से इलाज का आदान प्रदान 

दो दिवसीय सेमिनार में नए तरह से इलाज का आदान प्रदान किया जाएगा। उद्घाटन आइएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कटियार ने किया। डॉ. एसडी सिंह, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. जीशान, डॉ. चंदन लाल आदि उपस्थित रहे।  


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