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भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर कई विकल्पों पर विचार : सरकार


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नई दिल्ली,(एजेंसी) 26 मार्च । बढ़ते संशयों के बीच सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को फिर से जारी करने की संभावना को नकारने से इंकार कर दिया जो पांच अप्रैल को निष्प्रभावी होने जा रहा है।

सरकार इस मामले में विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। इसी बीच केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भविष्य में लागू होने वाले नौ संशोधनों को मंजूरी दी। इन्हें लोकसभा द्वारा पारित किये गये विधेयक में शामिल किया गया है और वह राज्यसभा में लंबित है। पिछले साल दिसंबर में जारी किये गये अध्यादेश को फिर से जारी करने का संकेत ग्रामीण विकास मंत्री बीरेन्द्र सिंह द्वारा दिया गया जिन्होंने चंडीगढ़ में संवाददाताओं से कहा कि अध्यादेश को फिर से जारी किया जा सकता है।

इस अध्यादेश का स्थान लेने वाले विधेयक के भविष्य के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘आप जानते हैं कि अध्यादेश पांच अप्रैल से निष्प्रभावी होने जा रहा है। राज्यसभा में इसे पारित नहीं किया गया है। हो सकता है कि इसे (अध्यादेश) फिर जारी किया जाये।’ दिल्ली में संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने इन खबरों को अटकल कहकर खारिज कर दिया कि सरकार अध्यादेश को पांच अप्रैल को निष्प्रभावी हो जाने देगी।

नायडू ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने आज कुछ जगह देखा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक को निष्प्रभावी होने दिया जायेगा। ये सब अटकलें हैं। सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं किया है जिसमें भूमि अधिग्रहण विधेयक को निष्प्रभावी होने दिया जायेगा।’ उन्होंने कहा कि जो कुछ भी करने की जरूरत होगी सरकार उसे उपयुक्त समय पर करेगी।

इस बीच सरकारी सूत्रों ने ऐसी घटनाओं की याद दिलायी जब सरकार ने लोकसभा के सत्र में रहने और राज्य सभा के सत्र में नहीं होने पर अध्यादेश जारी किये और इस विषय पर एक विधेयक संसद के समक्ष विचाराधीन है।

उन्होंने याद दिलाया कि ऐसी भी घटनाएं हैं जब राज्यसभा का सत्रावसान करने के बाद अध्यादेश जारी किया गया तथा लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया गया लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘आपको इस बारे में कैबिनेट द्वारा निर्णय किये जाने की प्रतीक्षा करनी होगी।’ उन्होंने कहा कि कैबिनेट इस पूरे मुद्दे पर फैसला करेगी। इसी के साथ सरकार ने प्रस्तावित भूमि विधेयक को बेहतर बनाने की मंशा जताते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष से विचार विमर्श के लिए तैयार है जिसके बारे में उनसे सुझाव मांगे गये हैं।

नायडू ने कहा, ‘सरकार सभी राजनीतिक दलों से बात करने को इच्छुक है तथा किसी को भी यदि संदेह है तो उन संदेहों पर गौर किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदन को आश्वासन दे चुके हैं कि यदि किसानों के खिलाफ कुछ भी हुआ तो सरकार उसमें (विधेयक में) बदलाव करने को तैयार है।

नायडू ने कहा, ‘लिहाजा मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि यदि आपके पास बेहतरी के कोई सुझाव हैं तो कृपया आगे आइये। हम मिलकर काम करेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राज्य 2013 का कानून लागू करना चाहता है तो वह ऐसा करने को स्वतंत्र है। सरकार ने पिछले साल 31 दिसंबर को भूमि अधिग्रहण पर एक अध्यादेश जारी किया था। इस अध्यादेश का स्थान लेने वाले विधेयक को 23 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र में संसद में लाया गया था।

वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण विधेयक में संशोधन के लिए लाये गये इस नये विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया है। यह विधेयक राज्यसभा में अटक गया क्योंकि पूरा विपक्ष इसके खिलाफ एकजुट हो गया और सत्तारूढ़ राजग के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।


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