Wednesday , 19 June 2019
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दीदी के गढ़ में गूंजेगा ‘जय श्री राम’ के साथ ‘जय मां काली’


पश्चिम बंगाल में जल्द ही ‘जय श्री राम’ के साथ ‘जय मां काली’ का नारा गूंजेगा । बीजेपी नेताओं ने ये नारा इसलिए तैयार किया है ताकि लोगों में ऐसा संदेश न नाए कि बीजेपी गैर बंगाली पार्टी है। आम जनमानस बीजेपी से जुड़ाव महसूस करे इसलिए बीजेपी ऐसा करने जा रही है।
बंगाल में बीजेपी अपनी जड़े मजबूत करने में लगी हुई है। लोकसभा चुनाव में मिली जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद है। इसी कड़ी में बीजेपी ने ‘जय श्री राम’ के साथ ही ‘जय मां काली’ के नारे को भी जोड़ने का फैसला किया है।

 

 

सांगठनिक बैठक में हुई चर्चा
लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी की पहली सांगठनिक बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल को लेकर विस्तार से चर्चा की।बैठक में अगले 6 महीनों के दौरान प्रदेश भर में घूम-घूमकर संपर्क अभियान चलाने की तैयारी पर चर्चा हुई।
पश्चिम बंगाल मामलों के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बंगाल में बीजेपी का प्रचार तब तक अधूरा रहेगा, जब तक टीएमसी सरकार सत्ता से बाहर नहीं हो जाती और बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार नहीं बन जाती।

विजयवर्गीय ने राज्य में लोकसभा चुनाव में पार्टी की शानदार जीत के बाद कहा, ‘पश्चिम बंगाल में हमारे नारे जय श्री राम और जय महाकाली होंगे। बंगाल महाकाली की धरती है। हमें मां काली का आशीर्वाद चाहिए।’ बीजेपी ने राज्य के लिए अपने नारों की सूची में ‘जय महा काली’ ऐसे समय में शामिल किया है, जब टीएमसी ने बीजेपी पर बाहरी लोगों की पार्टी होने का आरोप लगाया जो बंगाल की संस्कृति नहीं समझते।
इसके साथ ही बीजेपी ने सीएम ममता बनर्जी की अपील पर ‘जय हिंद, जय बांग्ला’ का नारा देने वालों को धन्यवाद नोट भेजने का निर्णय लिया है। पार्टी के अनुसार ‘जय हिंद बोलने में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि इससे राष्ट्रवादी भावनाओं को मजबूती मिलती है।’
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में कई पीढ़ियों से मां काली की पूजा होती आ रही है। यहां के लोग मां काली को बहुत मानते हैं। बंगाल में पहली बार लोकसभा चुनाव धर्म के नाम पर हुआ। इसके पहले बंगाल में विचारों पर चुनाव होता रहा है।
वहीं पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ‘हमें केवल जय श्रीराम के नारों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि यहां की ममता सरकार इस नारे को लगाने वालों के खिलाफ है। जय श्रीराम-जय मां काली यहां ज्यादा स्वीकार्य होगा, क्योंकि बंगाल में कई पीढ़ियों से मां काली की पूजा होती आ रही है।’


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