Wednesday , 20 November 2019
Home >> एडिटोरियल >> जानिए भगवान श्री राम के प्रमुख मंदिरो के बारे में

जानिए भगवान श्री राम के प्रमुख मंदिरो के बारे में


भारतीय संस्कृति में भगवान श्री राम का का स्थान सर्वोच्च स्थान है। भगवान श्री राम के नाम से सभी दुःख दर्द मिट जाते है। श्री राम का परम भक्त श्री हनुमान जी है जो एक संसार के सबसे शक्तिशाली है। भगवान श्री राम के नाम का जप स्वयं भगवान शंकर ने भी किया था। भगवान श्री राम के बिना इस भवसागर से पर नहीं हो सकते। भगवान श्री राम हिन्दू सभ्यता के स्रवप्रिय है।

आज हमें धरती पर सभी देवी देवताओ के मंदिर कई मिल जाते है लेकिन भगवान राम के मंदिर हमें ढूंढना पड़ते है। जानते है भगवान श्री राम व उनसे जुड़े कई प्राचीन मंदिर व दर्शनीय स्थलों के बारे में। श्री राम के मंदिर की बात हो और उसमे सर्वप्रथम अयोध्या का नाम ही याद आता है।

अयोध्या: अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बना हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार भगवान श्री राम का जन्म आज से तक़रीबन 7128 वर्ष अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व को अयोध्या में हुआ था। अयोध्या भारतीयों के सात तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। अयोध्या सरयू नदी के किनारे स्थित है। रामायण के अनुसार इस नगर का निर्माण मनु’ ने किया था। सरयू नदी के किनारे किनारे और भी भव्य मंदिर स्थित है। यहाँ पर 14 प्रमुख घाट है। इन घाटो में सबसे उल्लेखनीय घाट लक्ष्मण घाट , पापमोचन घाट , कैकेयी घाट, कौशल्या घाट,एवं गुप्तद्वार घाट प्रमुख घाट है।

रघुनाथ मंदिर : जम्मू में स्थित इस राम मंदिर का देश विदेशो में भी प्रचार है। इस मन्दिर पर की वास्तुकला सब को अपनी और आकर्षित कर लेती है। कहा जाता है की सन 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने इस मंदिर की पहली नीव राखी थी। तब कही जाकर महाराजा रणजीतसिंह के काल में इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। इस मंदिर के अंदर की दीवारो पर तीन तरफ से सोने की परत चढ़ी हुई है।

त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर : भारत के दक्षिण-पश्चिमी शहर त्रिप्प्रयार में यह ,मंदिर स्थित है। यह मंदिर त्रिप्रायर नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर हिन्दुओ का सबसे प्रमुख स्थान है। कहा जाता है कीस मंदिर में जो मूर्ति स्थापित की गई हे वह यहाँ के मुखिया को समुद्र तटपर मिली थी तब से ही वह यहाँ पर स्थापित की गई है। यहाँ पर भगवान की पूजा त्रिमूर्ति के रूप में की जाती है।

श्री सीतारामचंद्र स्वामी मंदिर : यह मंदिर आंध्रप्रदेश के खम्मण जिले के भद्राचलम शहर में स्थित है। यहाँ पर अभी रहवासी वनवासी है इसलिए भगवान राम को वनवासी के रूप में पूजते है। कहा जाता है की जब भगवान सही राम जब सीता माता को खोजने के लिए निकले थे तब वह यहाँ पर रुके थे। उस स्थान को अभी भी पर्णशाला के नाम से जाना जाता है इस स्थान पर माता सीता ने वनवास के दौरान अपने वस्त्र सुखाये थे।

श्रीतिरुनारायण स्वामी मंदिर: यह एक छोटा सा राज्य है जहा यह मंदिर स्थित है। यह मंदिर कावेरी नदी के तटपर स्थित है। यहाँ पर दो मंदिर स्थित है, हरिहरनाथ मंदिर: इस मंदिर की मान्यता है की यह मंदिर तब बनवाया था जब माता सीता स्वयंवर हुआ था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्प्रित है भगवान विष्णु को

थिरुवंगड श्रीरामस्वामी मंदिर: केरल में स्थित यह मंदिर अंग्रेजो द्वारा बनाया गया एक प्रसिद्ध किला है जहा से कुछ  ही दुरी पर राम मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 2,000 वर्ष पूर्व हुआ था।

रामभद्रस्वामी मंदिर: यहाँ स्थित मंदिर रामभद्रस्वामी के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। चित्रकूट का राम मंदिर: हिन्दुओ का यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थान है। इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। इसे अभी इलाहबाद के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सबसे प्राचीन वाल्मीकि आश्रम, मांडव्य आश्रम, भरतकूप है ।

मध्यप्रदेश का रामवन : जब भगवान श्री राम वनवास पर गए तब वह इस स्थान पर भी आये थे। यहाँ पर राम वन काफी प्रचलित है। शहडोल से पूर्वोत्तर की ओर सरगुजा क्षेत्र है। जहा एक भव्य कुण्ड बना हुआ है और यह कुण्ड सीता कुण्ड के नाम से प्रचलित है।

पंचवटी में राम : जब वनवास के अंत समय में भगवान श्री राम ने अपना वनवास नासिक के पंचवटी क्षेत्र में बिताया। भगवान यहाँ पर अगस्त्य मुनि के आश्रम में रहे थे। गोदावरी के तट को 5 वृक्षों का स्थान पंचवटी भी कहा जाता है। इसी जगह पर भगवान लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी।


Check Also

राशिफल : इन राशिवालों के लिए आज दिन रहेगा बेहद शुभ, मिलेगी सफलता

नक्षत्र अपनी चाल हर समय बदलते हैं. इन नक्षत्रों का हमारे जीवन पर भी बहुत …