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सुषमा स्वराज और उनकी कार्यशैली को याद किया: मोदी ने


मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनकी कार्यशैली को याद किया. दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सुषमा स्वराज से बहुत कुछ सीखा. पीएम ने कहा कि सुषमा स्वराज ने अपनी कार्यशैली से विदेश मंत्रालय की तस्वीर बदलकर रख दी. सुषमा स्वराज पर बोलते-बोलते पीएम मोदी पांच साल पहले चले गए और एक वाकये का जिक्र करने लगे. उन्होंने कहा कि जब 2014 में वो पहली बार प्रधानमंत्री बने तो सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बैठक में शामिल होने अमेरिका पहुंचे. पीएम ने कहा कि तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पहले ही वहां पहुंच चुकी थीं. पीएम ने कहा कि सुषमा स्वराज ने वहां पर उनका स्वागत किया. पीएम ने कहा कि वहां पर उन्होंने सुषमा स्वराज से कहा कि अगले दिन उन्हें भाषण देना है तो मिल बैठकर एजेंडे पर चर्चा कर ली जाए. इस पर सुषमा स्वराज ने उनसे पूछा कि क्या उनका भाषण तैयार है. पीएम मोदी ने जवाब में कहा कि वो बिना लिखे भाषण देते हैं. क्योंकि लिखा भाषण पढ़कर देने में वे सहज महसूस नहीं करते हैं. मोदी ने कहा कि उनके इस जवाब पर सुषमा स्वराज चौंक गईं और कहा, “ऐसे नहीं होता है भाई.”पीएम ने कहा, “मैं नया-नया था, मुझे भाषण देना था. जैसा मेरा स्वभाव है मैं बैक टू बैक काम करता हूं, मैं पहुंचा तो गेट पर सुषमा जी रिसीव करने के लिए खड़ी थीं, मैंने कहा चलिए बैठ लेते हैं कल मुझे बोलना है…सुषमा जी ने पूछा-आपकी स्पीच? मैंने कहा-बोल देंगे…चले जाएंगे क्या है? सुषमा जी ने कहा, ऐसा नहीं होता है भाई…जब दुनिया के सामने भारत की बात करनी होती है तो आप अपनी मनमर्जी से नहीं बोल सकते हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि रात को ही हम लोग बैठे, काफी दूरी तय कर अमेरिका पहुंचे थे, नवरात्रि की वजह से मेरे उपवास चल रहे थे. सबने मिलकर स्पीच तैयार की. मोदी उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, “सुषमा जी बोलीं, आप अपने विचार बोलिए, आप क्या कहना चाहते हैं, हम इसे लिखेंगे. सबने लिखा, ड्राफ्ट स्पीच रात को ही तैयार हुआ. सुबह मैंने देखा.” नरेंद्र मोदी ने कहा कि सुषमा स्वराज का बड़ा आग्रह था कि आप कितने ही अच्छा वक्ता क्यों न हो, आपके विचारों में कितनी ही साध्यता क्यों न हो, लेकिन कुछ फोरम होते हैं जहां की अपनी मर्यादा होती है. पीएम मोदी ने कहा कि यही वो पहला सबक था जो सुषमा स्वराज ने उन्हें सिखाया.


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