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2000 के नोटों की जमाखोरी की वजह से बाजार में मुद्रा प्रवाह कम हुआ


आर्थिक सुस्ती की तमाम वजहों में से एक नोटों की जमाखोरी भी है। सरकार ने कालेधन के इस्तेमाल को रोकने का दावा भले ही किया हो, लेकिन एक सच यह भी है कि 2000 के नोटों की जमाखोरी की वजह से बाजार में मुद्रा प्रवाह कम हुआ है।

यह ऐसी मुद्रा है जो न तो बाजार में है और न ही बैंकों में। यानी अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल करंसी का एक तिहाई हिस्सा लोगों के घरों-तिरोजियों में कैद है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मुद्रा का प्रवाह कम होने से भी लोगों की क्रय क्षमता घटी है।

देशभर में प्रचलित करंसी में 500 और 2000 के नोटों का कुल हिस्सा 82 फीसदी है। 51 फीसदी 500 की और 31 फीसदी 2000 की करंसी। नोटों की जमाखोरी दर्शाने के लिए कानपुर के कई करंसी चेस्ट की हकीकत को बानगी के तौर पर लेते हैं।


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