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दिल्ली पहुंचा सट्टेबाज, 2000 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच किए थे फिक्स


क्रिकेट को भद्रजनों का खेल कहा जाता है, लेकिन मैच फिक्सिंग के चलते कई बार इस खेल की छवि को नुकसान पहुंचा है। साल 2000 में ऐसे ही मैच फिक्सिंग कांड का भांडाफोड़ हुआ था, जिसमें सट्टेबाज संजीव चावला का नाम सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने 2000 में मैच फिक्सिंग रैकेट का भांडाफोड़ किया था। करीब 19 साल बाद वो दिन आ गया है, जब दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ग्लोबल क्रिकेट सट्टेबाज संजीव चावला को लेकर भारत पहुंच चुकी है। संजीव चावला 13 फरवरी (गुरुवार) की दोपहर भारत पहुंचा।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक आला-अफसर ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बुधवार को आईएएनएस से खास बातचीत में इसकी पुष्टि की थी कि वो उसे लंदन से दिल्ली लाया जा रहा है। इसी अफसर के मुताबिक, एक महीने के अंदर संजीव चावला को प्रत्यार्पित कराके भारत लाने की कोशिशों के तहत दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की टीमें कई बार लंदन गईं। हर बार कोई न कोई नई कानूनी प्रक्रिया आड़े आ जा रही थी। 

संजीव चावला को फाइनली दबोच कर लाने के लिए बीते रविवार को दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के डीसीपी (उपायुक्त) डॉ.जी. राम गोपाल नायक की टीम ने भारत से लंदन के लिए उड़ान भरी थी। उसके बाद दो-तीन दिन तक लंदन में कागजी और कानूनी खानापूर्ति चलती रही। बुधवार को ब्रिटेन सरकार ने संजीव चावला को लेने के लिए हरी झंडी दिखा दी। दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के सूत्रों के मुताबिक, डीसीपी अपराध शाखा डॉ. जी. रामगोपाल नायक के साथ दो इंस्पेक्टर भी गए थे। 

दिल्ली पहुंचने पर अपराध शाखा सबसे पहले संजीव चावला को कहां ले जाएगी?

आईएएनएस के इस सवाल के जबाब में दिल्ली में मौजूद अपराध शाखा के एक आला-अफसर ने कहा, ‘संजीव चावला कोई आम कैदी नहीं है। उसे एक विशेष संधि के तहत 19 साल बाद हम (भारत सरकार और दिल्ली पुलिस) प्रत्यर्पण कराके यहां ला पा रहे हैं। सबसे पहले उसका मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। फिर नियमानुसार उसे कोर्ट के सामने पेश कर उसकी पुलिस कस्टडी मांगी जाएगी।’

2000 का मैच फिक्सिंग माममा क्या था

दरअसल साल 2000 में 16 फरवरी और 20 मार्च को खेले गए भारत-दक्षिण अफ्रीका के मैच फिक्स करने के लिए दिल्ली पुलिस ने दक्षिण अफ्रीका टीम के कैप्टन रह चुके दिवंगत हैंसी क्रोनिए और पांच अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी हर्शल गिब्स और निकी बोए के फिक्सिंग से जुड़े होने के पर्याप्त सबूत न मिलने पर उनका नाम चार्जशीट से हटा दिया गया था। इस संबंध में 2013 में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी। इसमें हैंसी क्रोनिए, सट्टेबाज संजीव चावला, मनमोहन खट्टर, दिल्ली के राजेश कालरा और सुनील दारा सहित टी सीरीज के मालिक के भाई कृष्ण कुमार को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद से पुलिस संजीव को भारत लाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि मानवाधिकारों का हवाला देकर आरोपी ने यूरोपियन कोर्ट में प्रत्यर्पण के खिलाफ पिछले साल 23 जनवरी को अर्जी लगाई थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था।


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