Home >> बिज़नेस >> आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन में तनाव और बढ़ेगा जिससे वैश्विक व्यापार की स्थिति बिगड़ेगी: रघुराम राजन

आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन में तनाव और बढ़ेगा जिससे वैश्विक व्यापार की स्थिति बिगड़ेगी: रघुराम राजन


अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है. इस माहौल में अमेरिका और चीन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इससे वैश्विक व्यापार की स्थिति बिगड़ेगी. ये बात भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कही है.

रघुराज राजन ने कहा कि कोविड-19 के बीच दोबारा खुलने जा रही भारत और ब्राजील जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है.

इसके साथ ही रघुराम राजन ने चेताया कि अर्थव्यवस्था में कई ऐसी कंपनियां हो सकती हैं जो खस्ताहाल होंगी. उन्होंने कहा कि महामारी के बाद पुनरोद्धार की प्रक्रिया के साथ-साथ हमें चीजों को दुरुस्त करने की भी जरूरत होगी.

‘द न्यू ग्लोबल इकनॉनिक नॉर्म: पोस्ट कोविड-19’ विषय पर सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजन ने कहा, ‘‘अमेरिका और चीन का तनाव भारत, ब्राजील और मेक्सिको जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा. ये देश जब अपनी अर्थव्यवस्थाओं को खोल रहे होंगे, तो उन्हें मांग की जरूरत होगी, जिससे वे उबर सकें.

रघुराम राजन ने कहा, ‘‘कई देश ऐसे हैं, जिनमें लॉकडाउन के बावजूद नियंत्रण नहीं हो पाया. अमेरिका इसका प्रमुख उदाहरण है. भारत, ब्राजील ओर मेक्सिको में भी ऐसा हुआ. जबकि इसके लिए इन देशों ने काफी ऊंची लागत खर्च की.

ऐसे में इन देशों के लिए महामारी की लागत उन देशों की तुलना में काफी ऊंची बैठेगी, जो नियंत्रण करने में सफल रहे हैं.’’ राजन ने कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देश अब भी इस महामारी को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस समय मुख्य मुद्दा संक्रमण को रोकना है. दुर्भाग्य से यह संक्रमण काफी अधिक फैल चुका है. इसको नियंत्रित करना आसान नहीं होगा.

रघुराम राजन के मुताबिक इससे काफी अनिश्चितता की स्थिति पैदा हुई है. कंपनियां यह नहीं जानतीं कि क्या नए सिरे से लॉकडाउन लगाया जाएगा.

यदि ऐसा होता है, तो यह कितना कठिन होगा. राजन ने कहा कि भारत में भी कुछ राज्य लॉकडाउन की चर्चा कर रहे हैं. वास्तव में कुछ ने इसको लगाना भी शुरू कर दिया है.

राजन ने कहा कि विकसित देशों में 45 से 50 प्रतिशत आबादी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर सकती है. ऐसे में लॉकडाउन में भी वहां काम जारी रह सकता है. लेकिन गरीब और विकासशील देशों तथा उभरते बाजारों में काफी कम लोग घर से काम कर सकते हैं.


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