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माता यशोदा जयंती : मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो भगवान कृष्ण


हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की पालनहार मां यशोदा का जन्म हुआ था. भगवान कृष्ण को जन्म देवकी ने दिया था, लेकिन उनका पालन-पोषण सब मां यशोदा ने ही किया. इस दिन भक्त यशोदा मइया और भगवान कृष्ण की की पूजा पूरे विधि-विधान से करते हैं.

हालांकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांता कैलेंडर के अनुसार, माघ के महीने में यशोदा जयंती मनाई जाती है. हालांकि दोनों ही कैलेंडर में इसका दिन एक ही रहता है. ऐसी मान्यताएं हैं कि इस दिन उपवास करने से पापों का नाश होता है.

यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त- यशोदा जयंती 4 मार्च को यानी आज मनाई जा रही है. षष्ठी तिथि 4 मार्च को 12 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होकर इसी दिन रात 9 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो जाएगी.

यशोदा जयंती पर कैसे करें पूजा- भगवान कृष्ण के गांव गोकुल धाम में यशोदा जयंती पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. इसके बाद भक्त मां यशोदा के व्रत का संकल्प लेते हैं. भगवान कृष्ण के साथ मां यशोदा की पूजा में अगरबत्ती, फूल, तुलसी के पत्ते, हल्दी, चंदन, कुमकुम और नारियल का इस्तेमाल किया जाता है.

इसके बाद यशोदा और कन्हैया को केले, पान और सुपारी का भोग लगाया जाता है. इस दिन मां यशोदा के साथ बाल कन्हैया की पूजा का विधान है. संतान प्राप्ति या संतान से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस दिन व्रत करना बड़ा फलदायी माना जाता है.


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