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जान का जंजाल बना पोलीटेक्निक का फुटओवर ब्रिज


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नीलम यादव, खबर इंडिया नेटवर्क-लखनऊ, 5 फरवरी। लगभग चार वर्ष पूर्व लखनऊ में फैजाबाद रोड पर पालीटेक्निक चौराहे पर पैदल चलने वाले लोगों की सुविधा के लिए एक पैदलपार पथ या फूट ओवरब्रिज का निर्माण किया गया। कई लाख रुपये की लगत से बने इस पुल का बड़े उत्साह के साथ उद्घाटन हुआ और यह उम्मीद जताई गयी कि इसके बन जाने से इस व्यस्त चौराहे पर उन पैदल राहगीरों को सुविधा होगी जो यहाँ लगातार चलने वाले वाहनों की वजह से सड़क पार करने में मुश्किल का सामना करते हैं। साथ ही गोमतीनगर से फैजाबाद रोड पर कर इंदिरानगर जाने वाले लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद थी।
यह ठीक है कि इस पुल का निर्माण लोगो की सुविधा व सुरक्षा दोनो को ध्यान में रख कर हुआ है, लेकिन इसकी डिजाईन की वजह से इस का इस्तेमाल करने वालों को बहुत ज्यादा सीढियां चढ़नी पड़ती हैं और सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए लम्बा रास्ता तय करना पड़ता है।
इन कमियों का नतीजा यह हुआ कि इसके उद्घाटन के कुछ समय बाद से ही पैदल यात्रियों ने इसका इस्तेमाल करना कम कर दिया और आज इस पर सन्नाटा छाया रहता है। लगभग 100 मी. लम्बा यह पुल आज सुनसान पड़ा है। इसमें लगी सभी ट्यूब लाइट, बल्ब और उनके होल्डर व तार तक चोरी हो चुके हैं, और इस पर गन्दगी जमा रहती है।
इस पर छाये सन्नाटे की वजह से इस फुटओवर ब्रिज पर होने वाली वारदातें आये दिन बढ़ती ही जा रही है। यह पुल चैन स्नैचिंग , पाकेट मार , छोटी-मोटी लूटपाट जैसी घटनाओ का अड्डा बनता जा रहा है। कुछ दिन पहले ही एक महिला की चैन खीचने का मामला सामने आया था, इसी तरह कभी चाकू की नोक पर जबरन सामान छीन लेना तो कभी चुपचाप पाकेट मार लेना जैसी घटनाये इस पुल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए आम हो गयी है। यही वजह है कि लोगो के अंदर इतनी दहशत भर चुकी है कि लोग जान की परवाह किए बगैर सड़को से गुजरने को मजबूर हो गये है।
जब हमने इन वारदातो की वजह लोगो से जानने की कोशिश की तो उससे यही सामने आया कि पुल पर कम लोगों के जाने की वजह से और शाम होते ही अँधेरा होने की वजह से इस पर अराजक तत्त्व इकठ्ठा रहते हैं। यहाँ बैठ कर यह लोग मादक पदार्थो, ड्रग्स आदि का सेवन करते हैं। साथ ही, पुल के दोनों ओर पोस्टर, होर्डिंग आदि लगे होने के कारण नीचे से कुछ दिखाई नहीं पड़ता और वहा होने वाली वारदाते किसी को नज़र नही आती, जिसका फायदा उठाकर ये लुटेरे अक्सर अपने काम को अंजाम देते है।
उससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि पुल के ठीक नीचे पुलिस चौकी स्थित है जहां कुछ पुलिस कर्मी हमेशा रहते हैं। लेकिन वे सड़क पर चलने वाले वाहनों और पार्किंग में इतना उलझे रहते हैं कि उन्हें ओप्पर पुल की ओर देखने की फुर्सत ही नहीं है।
लोगों के मुताबिक कई बार पीडितो ने अपनी आपबीती नीचे खड़े ट्रैफिक पुलिस से कही लेकिन कभी गाडि़यो को पास कराने के बहाने ,कभी थाने मे रिपोर्ट दर्ज कराने के बहाने ये सिपाही बचते आये है और कभी जाने पर भी लुटेरे नौ दो ग्यारह हो चुके होते है। वही दूसरी ओर इन वारदातो के बारे मे जब वहा पर मौजूद एक पुलिसकर्मी से बात की तो पता चला कि उनके पास भी तमाम शिकायतें आ चुकी हैं। फिलहाल पुलिस हाथों कोई कामयाबी तो नही लगी पर दावा ज़रूर किया है कि बहुत जल्द लुटेरे इनके कब्जे मे होगे और ब्रिज पर लोगो की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है ।
जब तक इस पुल का इस्तेमाल पैदल यात्री नहीं करते तब तक यह बेघर लोगों और अपराधिक तत्त्वों का अड्डा ही बना रहेगा।

 


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