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उद्योग व शिक्षा जगत की साझेदारी जरूरी : प्रधानमंत्री


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नई दिल्ली,एजेंसी-7 फरवरी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि देश में उद्योग जगत और शिक्षा जगत की साझेदारी जरूरी है और इसे प्रोत्साहित करने के लिए नए तरीके ढूढने की जरूरत है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध के लिए मूल्यवान संसाधनों तक पहुंचते हैं जबकि उद्योग जगत धन पोषित शोध के परिणामों से लाभ उठाता है।

उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा तक पहुंच तथा गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। हमने शिक्षा के सभी स्तरों- प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च पर प्रयास किया है तथा व्यावसायिक शिक्षा तथा कौशल विकास में भी प्रमुख कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब कमियों को दूर करने, खासकर गुणवत्ता की कमी को दूर करने, पर ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा उच्च शिक्षा में पहुंच, समानता तथा गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय विश्वविद्यालय हमारी उच्च शिक्षा संस्थागत प्रणाली के महत्वपूर्ण घटक हैं। स्वतंत्रता के बाद से देश में 46 केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं और पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार ने 26 केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए हैं। सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालयों को परिवर्तन की एजेंसी के रूप में देखती है।’’

उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालय दूर-दराज तथा पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं ताकि देश के कम विकसित हिस्सों में उच्च शिक्षा तक पहुंच में सुधार हो सके। इन विश्वविद्यालयों से आशा की जाती है कि वे छोटे व्यावसायिक केंद्र, विज्ञान और टेक्नॉलोजी पार्क तथा औद्योगिक परामर्श केंद्र स्थापित कर आस-पास के क्षेत्रों में शैक्षणिक माहौल बनाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अनुभव बताता है कि आपसी संपर्क से विश्वविद्यालयों तथा उद्योग दोनों को मजबूती मिलती है। विश्वविद्यालय शोध के लिए मूल्यवान संसाधनों तक पहुंचते हैं, जबकि उद्योग जगत धन पोषित शोध के परिणामों से लाभ उठाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि हमें अपने देश में उद्योग जगत तथा शिक्षा जगत की साझेदारी को प्रोत्साहित करने के लिए नए तरीके ढूंढने की जरूरत है। मैं केंद्रीय विश्वविद्यालयों से अपेक्षा करता हूं कि वे इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएं क्योंकि यह शोध की गुणवत्ता सुधारने का निश्चित मार्ग साबित होगा।’’

उन्होंने कहा कि शैक्षिक संस्थानों के क्षमता निर्माण में भी सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी बहुत उपयोगी हो सकती है। इसको मानते हुए सरकार ने 2009 में सूचना तथा संचार टेक्नोलॉजी के जरिए राष्ट्रीय शिक्षा मिशन शुरू किया। इस मिशन ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को ई-कंटेंट विकसित और लागू करने का अप्रत्याशित अवसर दिया और इसका परिणाम यह हुआ कि शिक्षा तक पहुंच बढ़ी और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक लगभग 400 विश्वविद्यालय तथा 20,000 कॉलेजों को इस मिशन के तहत उच्च गति की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की गई है।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की चर्चा काते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षा तथा शोध की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों पर अधिक ध्यान दे रहा है। इसका उद्देश्य 286 राज्य विश्वविद्यालयों तथा राज्यों के 8500 कॉलेजों को अवसंरचना अनुदान उपलब्ध कराने के अलावा 278 नए विश्वविद्यालय तथा 388 नए कॉलेज स्थापित करना है और 13वीं योजना के अंत तक 266 कॉलेजों को मॉडल डिग्री कॉलेजों में बदलना है। इससे 20,000 नए फैकल्टी पदों का सृजन होगा और इसे 12वीं तथा 13वीं योजना अवधि में समर्थन दिया जाएगा।


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