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FIFA : क्या है फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था में धांधली की हकीकत


नई दिल्ली,(एजेंसी)28 मई। बुधवार सुबह ज़्यूरिख शहर के पांच सितारा होटल में सादे कपड़ों में देश की पुलिस ने फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा के छह अधिकारियों को गिरफ्तार कर सबको सन्न कर दिया।

कुछ ही घंटों के बाद दूसरे महाद्वीप उत्तरी अमेरिका में इससे जुड़े अधिकारियों, स्पोर्ट्स मार्केटिंग के बड़े-बड़े नाम और एक बड़े टीवी चैनल के अधिकारियों के खिलाफ़ कुल 47 मामले दर्ज हुए।

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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भ्रष्टाचार के कई मामलों में इन लोगों पर पहले से अमेरिका के न्याय विभाग की नजर थी। मुख्य रूप से आरोप यह था कि फीफा ने प्रसारण अधिकार (मैच दिखाने के अधिकार) को बेचने में धांधली की है और इस संस्था की धांधली का मामला अब का नहीं बल्कि 1991 से चला आ रहा है जब फीफा के अधिकारियों ने कई मौकों पर अलग-अलग डील के माध्यम से अरबों डॉलरों का भ्रष्टाचार किया और अपने-अपने पदों का दुरुपयोग किया।

फीफा पर भ्रष्टाचार के मामले लगातार लगते रहे हैं, लेकिन हद तो तब हो गई जब 2010 में फीफा ने 2022 के फुटबॉल विश्व-कप के आयोजन के लिए कतार को चुना, एक ऐसा देश जहां फुटबॉल की लोकप्रियता और सुविधाओं पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

इतना ही नहीं जिस मई के महीने में कतार में विश्व-कप का आयोजन होना है, उस वक्त वहां पारा 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है। इतना तापमान तो यूरोप के कई देशों के खिलाड़ियों ने कभी देखा भी नहीं होगा।

इस फैसले की काफी आलोचना हुई और कहा जाने लगा कि कतार के तेल के पैसे ने आयोजन के अधिकारों को हासिल करने के लिए खूब वोट मनमाने दामों पर खरीदे होंगे। हालांकि, मौजूदा गिरफ्तारियों का इस मामले से फिलहाल कोई लेना-देना नहीं बताया जा रहा है।

कौन-कौन पकड़े गए?
इस पूरे मामले में उत्तरी अमेरिका और द.अमेरिका की संस्थाओं के कुछ अधिकारी शामिल थे। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वह केमैन द्वीप, ट्रनिडाड एंड टोबैगो, निकार्गुआ, कोस्टा रिका, उरुग्वे और वेनेज़ुएला के अधिकारी थे।

गिरफ्तार लोगों में सिर्फ फुटबॉल से जुड़े अधिकारी ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स मार्केटिंग से वास्ता रखने वाले ब्राज़ील और हवाई के कई बड़े-बड़े नाम इस वक्त सलाखों के पीछे हैं।

कैसे भ्रष्ट हुआ फ़ीफ़ा?
इस वक्त फीफा के 209 सदस्य देश हैं और हर देश को एक वोट मिलता है। चाहे अध्यक्ष का चुनाव हो या फिर कोई और बड़ा फैसला लेना हो। मतलब यह कि ब्राज़ील, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे बड़े नामों को भी एक वोट मिलता है और माल्दीव्स, अंडोरा जैसे छोटे-छोटे देशों को भी एक वोट मिलता है।

यानी जब बड़े फैसलों पर वोटिंग का मामला होता है तो इन छोटे देशों के प्रतिनिधियों को जमकर घूस दी जाती है। इसलिए इस पूरी प्रक्रिया को बदलने के लिए कभी भी कोई देश तैयार नहीं होता।

जानकारों का मानना है कि इसी प्रक्रिया का फ़ायदा उठाकर सेप ब्लाटर पिछले चार बार से फीफा के अध्यक्ष बने हुए हैं और इस बार भी वह पांचवीं बार अध्यक्ष पद की रेस में सबसे आगे नज़र आ रहे हैं।

कई लोग इस सिस्टम को बदलने की मांग कर रहे थे। बहरहाल, फ़ुटबॉल की दुनिया में आए इस भूकंप से कई और सुधार आने की उम्मीद बंधी है।


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