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अरुणा शानबाग का दोषी सोहनलाल बोला, परिवार के लोग तक बात नहीं करते


लखनऊ,(एजेंसी)30 मई। पिछले दिनों अरुणा शानबाग की मृत्यु की खबर देश-विदेश में छाई रही। अरुणा पर जानलेवा हमला करने का दोषी सोहनलाल वाल्मिकी यूपी के एक गांव में है, इस खबर के सामने आने के बाद मीडिया ने उस गांव का रुख कर लिया जब सोहनलाल वाल्मिकी के गांव पहुंचा तो उनके परिवार ने बताया कि मीडिया की बड़ी बड़ी गाड़ियां उन्हें पता नहीं कहां ले गईं।

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सोहन लाल वाल्मीकि के पुत्र रविन्द्र ने बताया, जिस समय की यह घटना हैं जब हम पैदा भी नहीं हुए थे। हमारे पिता एनटीपीसी में मजदूरी करते हैं और मैं और मेरा बडा भाई कृष्ण भी उन्हीं के साथ मजदूरी करते हैं।

उसने बताया, मेरी एक बडी बहन की शादी हो गई है और छोटी बहन के हाथ पीले करने के लिए लडका ढूंढ रहे हैं। हम बहुत गरीब हैं और मीडिया वाले पता नहीं क्यों हमारे पीछे पड गए हैं।

सोहनलाल की बहू ने कहा, पिछले दो दिन से मीडिया वालों ने हमें परेशान कर रखा हैं अब मीडिया वाले मेरे ससुर और पति को अपने साथ नोएडा ले गये। कल पूरी रात से हमें सोने भी नहीं दिया और रात 3 बजे मेरे ससुर और पति को अपने साथ ले गए।

गांव वालों ने बताया कि सोहनपाल वाल्मीकि पिछले लगभग 35-40 वर्षो से गांव में रह रहा है। गांववालों के मुताबिक उन्हें वाल्मिकी पर लगे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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सोहनलाल को है अफसोस

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक सोहनलाल को अफसोस है लेकिन वह ये मानने को तैयार नहीं है कि उसने हत्या या बलात्कार किया है। एक टीवी चैनल से बात करते हुए सोहनलाल ने कहा कि मैं भी सिसक सिसक कर जीवन जी रहा हूं। परिवार के लोग तक मुझसे बात नहीं करते।

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अरुणा शानबाग का आरोपी सोहनलाल

68 साल की उम्र में अरुणा का निधन हो गया। वे 42 साल से कोमा में थीं यानि उनकी उम्र करीब 26 साल थी जब वे कोमा में पहुंचीं। अरुणा मुंबई के केईएम अस्पताल में बतौर ट्रेनी नर्स काम करती थीं और इसी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।

1973 में सोहनलाल नाम के वार्डब्वॉय के साथ उनकी कहासुनी हुई, सोहनलाल ने उन पर जानलेवा हमला किया, उनके साथ रेप करने की कोशिश की और कुत्ते को बांधने वाली जंजीर से उनका गला दबाया। ऐसा करने से अरुणा के दिमाग में ऑक्सीजन जानी बंद हो गई और पूरा शरीर सुन्न हो गया। सोहनलाल उन्हें मरा समझकर वहां से भाग गया। लेकिन अरुणा को मौत नहीं आई, वो कोमा में पहुंच गईं।

इस जघन्य वारदात के लिए सोहनलाल को गिरफ्तार किया गया, उस पर हत्या के प्रयास और बलात्कार का मामला चला। बलात्कार का आरोप साबित नहीं हुआ लेकिन हत्या की कोशिश के लिए साल साल की सजा हुई, जिसके बाद वह आजाद हो गया।

सोहनलाल आजाद हो गया लेकिन अरुणा अभी भी बंधी थीं, अस्पताल से, बिस्तर से और जिन्दगी से। अरुणा की सेवा के लिए नर्सें तो थीं लेकिन उनके अपने परिवार ने उनसे नाता तोड़ लिया था। उनकी हालत देखकर केईएम अस्पताल की पूर्व नर्स पिंकी वीरानी ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में उनके लिए इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

18 मई 2015 को अरुणा तो इस दुनिया से चली गईं लेकिन इस बहस को छोड़कर कि इच्छामृत्यु दी जानी चाहिए या नहीं।


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