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BSP की नजर अब मुस्लिम वोटबैंक पर


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लखनऊ,एजेंसी-17 फरवरी। उत्तर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग के अपने नए नारे में ब्राह्मण कार्ड खेलने के बाद इस बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नजर मुस्लिम समुदाय पर टिकी है. लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद प्रदेश के मतदाताओं के मूड को भांपते हुए बसपा का मुस्लिम प्रेम बढ़ने लगा है.

मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा ने पार्टी के इस प्रेम को और गाढ़ा करने का काम किया है. इसी के मद्देनजर बसपा लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से 20 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी में है. वर्तमान में पार्टी के कुल 20 सांसदों में चार सांसद मुस्लिम हैं.

मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों ने राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाला है. दंगे को लेकर मुल्ला-मौलवियों ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं. दंगों को लेकर जिस तरह से वर्तमान सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए, उससे बसपा को इस बात का आभास होने लगा है कि मुस्लिम समाज की यह नाराजगी बैलेट बॉक्स पर जरूर असर करेगी.

पार्टी का मानना है कि सपा का प्रदेश में मुख्य वोट बैंक माना जाने वाला मुस्लिम मतदाता उससे दूर हो गया है, जिस वोट बैंक के दम पर 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने अन्य पार्टियों को पीछे छोड़ दिया और प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाबी भी हासिल की. यही नहीं बसपा का यह भी मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिम समाज कांग्रेस की ओर रुख नहीं करेगा.

कमर तोड़ मंहगाई और भ्रष्टाचार को लेकर समय-समय पर लगे आरोपों ने भी कांग्रेस की छवि धूमिल करने का काम किया है. कांग्रेस के खिलाफ बहने वाली इस धारा को विगत माह चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने और बल दिया है. इस चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी पराजय से मतदाता का रुझान करीब-करीब साफ हो गया है.

ऐसे में बसपा को उम्मीद है कि मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का साथ देकर अपना वोट खराब करना नहीं चाहेगा. ऐसी दशा में बसपा मुस्लिम समाज को अपनी ओर करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. अब पार्टी ने अपनी चुनावी सभाओं में बसपा सरकार द्वारा मुस्लिम समाज के हित में किए गए कार्यो को गिनाना शुरू कर दिया है. साथ ही इस बार के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में मुस्लिम समाज को खास तवज्जो देने की रणनीति बनाई गई है.

पार्टी सूत्रों की माने तो पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले डेढ़ गुना से ज्यादा मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों को टिकट मिलने की संभावना है. खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा ने प्रदेश की लोकसभा की 80 सीटों में से 14 पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें चार पर पार्टी को कामयाबी मिली थी.


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