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मंत्री राममूर्ति का बचना मुश्किल, इंस्पेक्टर समेत 5 सस्पेंड


लखनऊ,(एजेंसी)14 जून। एसपी सरकार भले ही अपने राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा को बचाने के लिए हर जोर लगा रही है। लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य और जगेन्द्र का मौत से पहले दिए गए बयान का मंत्री के गले की फांस बनना तय है। मंत्री पर शिकंजा कसने की शुरुआत हो चुकी है। तत्कालीन इंस्पेक्टर सदर बाजार प्रकाश राय समेत पांच पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि यह कार्रवाई करने में अधिकारियों को पांच दिन लग गए। निलंबित पुलिसवालों पर मंत्री की शह पर जगेन्द्र को जलाकर मारने का आरोप है। आरंभिक पूछताछ में इनके बयानों में काफी विरोधाभास मिला है। जो इन पर और राज्यमंत्री पर शिकंजा कसने में अहम साबित होंगे।

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आईजी कानून एवं व्यवस्था ए सतीश गणेश ने बताया कि जागेन्द्र के बेटे राघवेन्द्र ने अपनी एफआईआर में जिन तीन-चार अज्ञात पुलिसवालों का जिक्र किया था उनकी शिनाख्त एसआई क्रांतिवीर सिंह, हेड कांस्टेबल प्रोन्नत सुभाष चन्द्र यादव, कांस्टेबल उदयवीर सिंह और मंसूर के रूप में हुई है। इनके नामों को केस डायरी में शामिल कर लिया गया है। आरंभिक पड़ताल के बाद इनके बयानों में घटना को लेकर काफी विरोधाभास मिला जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। अब इनके बयानों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके अलावा एक जून को हुई घटना के बाद शाहजहांपुर से झांसी स्थानांतरित हुए तत्कालीन इंस्पेक्टर सदर बाजार प्रकाश राय को भी झांसी में निलंबित कर दिया गया है। एसपी शाहजहांपुर ने डीआईजी रेंज झांसी को प्रकाश राय के खिलाफ आख्या भेजी थी। उधर फोरेंसिक टीम ने जागेन्द्र के सदर बाजार स्थित घर जहां वारदात हुई थी वहां से जुटाए सैंपल को जांच के लिए लैब भेज दिया है। एक सप्ताह के अंदर उनकी रिपोर्ट आ जाएगी। साक्ष्यों, आरोपितों और स्वतंत्र गवाहों के जरिए सीन का रीकंस्ट्रक्शन किया जाएगा। स्वतंत्र गवाह के रूप में पुलिस आसपास के लोगों से संपर्क कर रही है। इसके अलावा मौके पर मौजूद रही एक महिला को गवाही के लिए सफीना भेजा गया है।

मृत्युपूर्व बयान की कॉपी लेने के लिए दिया प्रार्थना पत्र
जागेन्द्र की हत्या के सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य उनके मृत्युपूर्व बयान की कॉपी कोर्ट से लेने के लिए विवेचक इंस्पेक्टर जेपी तिवारी सीजेएम के यहां अर्जी लगा दी है। सोमवार या मंगलवार तक बयान की कॉपी मिलने की उम्मीद है। कॉपी मिलते ही उसे विवेचना में शामिल कर लिया जाएगा। आईजी कानून एवं व्यवस्था का कहना है कि इवीडेंस एक्ट की धारा 32 के तहत मृत्यु पूर्व दिया गया बयान कोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसे नकारना काफी मुश्किल होता है। इस लिहाज से राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा और आरोपित पुलिसवालों का बचना मुश्किल होगा। क्योंकि जागेन्द्र ने मृत्युपूर्व दिए गए बयान में इन सभी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है।

सुरक्षा के लिए गारद लगी
जागेन्द्र के परिवार को मिल रहे प्रलोभन और धमकियों की शिकायत को देखते हुए सुरक्षा के लिए घर के बाहर आर्म्स पुलिस की एक गारद तैनात कर दी गई है। घरवालों से कहा गया है कि अगर कोई भी धमकाता या परेशान करता है तो जानकारी दें उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री पर कार्रवाई से हिचक रही सरकार
सरकार के मंत्री पर सीधे एक्शन न लेने की वजह पूरी सियासी है। शाहजहांपुर में बड़ी तादाद में पिछड़ों की आबादी है, राममूर्ति उसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते है। वह यहां से कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं तो उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस लोध और कुर्मी बाहुल्य पूरी बेल्ट में राममूर्ति का खासा दबदबा है। समाजवादी पार्टी पिछड़ों के इस वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती।

मामला गंभीर है। मंत्री और बाकी आरोपितों के खिलाफ पहले जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्यों को तर्क के आधार पर विवेचना में शामिल किया जाएगा। साक्ष्यों के आधार पर जिसकी जो भूमिका होगी उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
ए सतीश गणेश, आईजी कानून एवं व्यवस्था

राम गोपाल यादव के बयान पर भड़के जगेंद्र के परिजन

कहा जगेंद्र पर हुई फर्जी एफआईआर पर तो उसे अपराधी बना दिया गया था

राममूर्ति पर गम्भीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई न होने से घर वाले पहले से ही खफा है। उस पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव के बयान कि एफआईआर दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं हो जाता से जगेंद्र से परिजन और भड़क गए है। परिजनों का कहना है कि जगेंद्र पर जो एफआईआर दर्ज हुई थी वो फर्जी थी उस पर भी गम्भीर धाराएं नहीं थी उसके बावजूद पुलिस ने उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया था। फिर सरकार मंत्री को क्यों बचा रही है?

जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह ने कहा कि यह बहुत ही दुख की बात ही कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। सिर्फ बाहुबलियों और दबंगों की ही सुनवाई हो रही है। राममूर्ति एक मंत्री है इसलिए सरकार उसे बचा रही है।

जगेंद्र के बेटे पुष्पेंद्र ने सवाल उठाया कि राममूर्ति पर तो 302 जैसी धारा में एफआईआर है जबकि उसके पिता पर फर्जी 307 धारा लगाई गई थी। 307 की फर्जी धारा के बाद पुलिस उसके पिता को गिरफ्तार करने के लिए परेशान कर रही थी। मंत्री पर तो उससे बड़ी धारा लगी है और उसके सबूत हैं उसके बावजूद मंत्री को सरकार बचा रही है।

साधारण नहीं है एफआईआर
जगेंद्र के वकील वीपी सिंह चौहान ने कहा कि राम गोपाल यादव ने जो बयान दिया है वो बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है। राममूर्ति पर जो धाराएं लगी है वो गम्भीर हैं। यही नहीं धाराओं के अतिरिक्त राममूर्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत भी हैं। इनमें जगेंद्र की फेसबुक वॉल पर उसका पोस्ट जिसमें उसने एक दिन पहले भी राममूर्ति से उसकी जान को खतरा जताया था, शामिल है। यही नहीं मजिस्ट्रेट के सामने उसके कलमबद्ध बयान, मरने से पहले उसके बयान का वीडियो, इनसे बड़ा सबूत क्या होगा? वकील ने बताया कि राममूर्ति पर 302 हत्या, 452 घर में जबरन घुसना, 504 गाली गलौज, 506 जान से मारने की धमकी देना जैसी धाराएं है। 302 धारा जिसमें फांसी की सजा है इससे बड़ी धारा कोई नहीं है।


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