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अयोध्या में मंगलवार को होगी वीएचपी की ‘महत्वपूर्ण’ बैठक


अयोध्या/ फैजाबाद,(एजेंसी)16 जून। अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली उच्चस्तरीय समिति ‘राम जन्मभूमि न्यास’ मंगलवार को होने वाली बैठक में ठप चल रहे हिंदुत्व प्रॉजेक्ट के बारे में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेगी। पूर्व बीजेपी सांसद और न्यास के वरिष्ठ सदस्य राम विलास वेदांती ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस बैठक में राम मंदिर के निर्माण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

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वीएचपी के एक प्रवक्ता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, ‘स्पष्ट बहुमत के साथ एनडीए के सत्ता में आने के बाद वीएचपी ने सरकार को सेटल होने के लिए कुछ समय दिया। मोदी सरकार के एक साल पूरा होने के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से जुड़े कुछ ‘बड़े’ फैसले लेने में अब हम और देर नहीं करना चाहते हैं।’ न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

वीएचपी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल और उनके उत्तराधिकारी प्रवीण तोगड़िया इस बैठक के लिए अयोध्या पहुंच चुके हैं। संभावना है कि वे केंद्र सरकार के सामने मंदिर के मुद्दे को उठाने के लिए एक समिति का गठन करेंगे। वीएचपी के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि यह बैठक संभवत: उस प्रतिनिधि मंडल के गठन के लिए रखी है, जो पीएम नरेंद्र मोदी से मंदिर के निर्माण संबंधी मुद्दे पर बात करेगा। प्रस्तावित मंदिर के पत्थर पहले ही मनीराम छावनी में तैयार किए जा चुके हैं।

इस मीटिंग के मद्देनजर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और अयोध्या, फैजाबाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। बीजेपी पदाधिकारियों के मुताबिक वे मंदिर मुद्दे को लेकर प्रतिबद्ध हैं, लेकिन राज्यसभा में बहुमत ना होने की वजह से वे बिल को संसद में पेश नहीं कर सकते। वैसे एक साल तक मंदिर मुद्दे पर शांत रहने वाले आरएसएस और वीएचपी एक साल खत्म होते-होते मंदिर मुद्दे को अपनी प्राथमिकता बना चुके हैं।

पिछले महीने मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर नागपुर में आरएसएस प्रवक्ता अरुण कुमार ने कहा था, ‘बीजेपी सरकार को अपने चुनावी वादे पूरे करते हुए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए। विशेष रूप से राम मंदिर मुद्दा और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 पर कार्य किया जाना चाहिए।’

पिछले सप्ताह सिंघल ने मुस्लिमों से अयोध्या, काशी और मथुरा के विवादास्पद स्थानों को सौंप देने की अपील की थी। इससे पहले पिछले महीने हरिद्वार में वीएचपी के मार्गदर्शक मंडल ने एक बैठक में सरकार से राम मंदिर के निर्माण की राह में आ रहीं बाधाओं को ‘साफ करने’ की बात कही थी। वीएचपी ने अयोध्या में मंदिर के साथ-साथ एक मस्जिद के निर्माण के विचार को भी सिरे से नकार दिया था।

सिंघल ने कहा था, ‘हिंदुओं के तीर्थस्थल पर मुस्लिमों की पूजा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।’ इससे पहले अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। अयोध्या में विवादित भूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। रामजन्मभूमि न्यास की स्थापना वीएचपी द्वारा एक स्वतंत्र ट्रस्ट के रूप में 1993 में की गई थी। इसका उद्देश्य प्रस्तावित मंदिर का निर्माण करवाना था।


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