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सरकार रद्द कर सकती है मोदी का पासपोर्ट


नई दिल्ली,(एजेंसी)18 जून। मनी लॉन्ड्र‍िंग मामले में फंसे पूर्व आईपीएल चीफ ललित मोदी को मदद मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मुश्कि‍लें खत्म होने की बजाय बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। इंटरव्यू में ललित मोदी के खुलासे ने बीजेपी और सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। ललित ने मदद के साथ ही लंदन में सुषमा से मुलाकात का दावा किया है, वहीं खबर है कि सरकार ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द कर सकती है।

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ललित मोदी की फाइल फोटो

बताया जाता है कि विदेश मंत्रालय ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यही नहीं, मंत्रालय पासपोर्ट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है, जबकि ईडी भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी में है।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस पूरे प्रकरण में फजीहत झेल रही मोदी सरकार और बीजेपी वसुंधरा राजे का बचाव करने की मुद्रा में नहीं है। पार्टी ने वसुंधरा से खुद अपना पक्ष रखने को कहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वसुंधरा ने बुधवार शाम बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से फोन पर बात की और अपना पक्ष रखा। वसुंधरा ने अध्यक्ष से मिलने के लिए समय भी मांगा है।

चिदंबरम ने केंद्र से पूछे सवाल
इस बीच यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने 7 सवालों के जरिए सरकार से पूछा कि जब 2011 में ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था तो उन्हें नया पासपोर्ट जारी करने का आदेश किसने दिया। यही नहीं, चिदंबरम ने कहा कि ललित मोदी के खि‍लाफ 16 केस हैं। मामले में ब्रिटेन और भारत सरकार के बीच जो पत्राचार हुए हैं, सरकार को उन दस्तावेजों को सावर्जनिक करना चाहिए।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि अगर विदेश मंत्री ने मानवता के आधार पर ललित मोदी की मदद की तो वह उन्हें भारतीय उच्चायोग में अर्जी डालने के लिए भी कह सकती थीं। सरकार की ओर से ललित मोदी को वापस भारत आने के लिए क्यों नहीं कहा गया। सरकार को यह सुनिश्चि‍त करना चाहिए कि ललित मोदी भारत आए और फिर उनके खि‍लाफ आरोपों की ईडी द्वारा जांच हो।

रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर सकता है ईडी
ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी ललित मोदी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ेगी। इसके तहत उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जाएगा। इसका मतलब होगा कि ब्रिटेन प्रशासन ललित मोदी की गिरफ्तारी के बारे में फैसला कर सकेगा और इसके बाद उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू होगी।

ईडी के पास हैं पक्के सबूत: सूत्र
ईडी के सूत्रों का कहना है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के एक मामले में ललित मोदी के खिलाफ एजेंसी के पास पक्के सबूत हैं और इनके सहारे ब्रिटिश अदालत में भी ललित मोदी को घेरा जा सकता है। ईडी सूत्रों ने बताया कि अब तक ललित मोदी के खिलाफ सिर्फ ब्लू कॉर्नर नोटिस ही जारी किया गया था, क्योंकि अब तक उनके खिलाफ कोई मजबूत सबूत नहीं था, जिसे ब्रिटिश कोर्ट में पेश करने की जरूरत होगी. लेकिन अब मामले की जांच काफी आगे बढ़ चुकी है और अब ईडी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। ईडी को अब रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए हरी झंडी का इंतजार है।

नियमों से किया गया काम: ब्रिटेन
उधर ब्रिटेन का कहना है कि लंदन में रह रहे ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज जारी करने में उपयुक्त तरीके से और नियमों के मुताबिक काम किया गया। ब्रिटेन के गृह विभाग के प्रवक्ता ने बताया, ‘हम व्यक्ति विशेष के मामलों के ब्योरों पर नियमित रूप से टिप्पणी नहीं करते। यह मामला उपयुक्त नियमों के मुताबिक निपटाया गया।’

सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग
आईपीएल के संस्थापक उस विवाद के केंद्र में हैं जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज घिर गई हैं। सुषमा पर आरोप लगा है कि उन्होंने कथित तौर पर ललित की पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए ब्रिटेन के अधिकारियों पर उन्हें पुर्तगाल जाने के दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कूटनीतिक दबाव डाला।

आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के कथित मैच फिक्सिंग और अवैध सट्टेबाजी में घिरने के आरोपों के बीच ललित 2010 में लंदन पहुंचे थे। बाद में उनका भारतीय पासपोर्ट रद्द कर दिया गया, जिसके चलते वह ब्रिटेन में ही रुक गए। संडे टाइम्स की सिलसिलेवार खबरों में वाज की ओर से अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने ब्रिटिश गृह विभाग के अपने ईमेलों में एक जगह सुषमा का भी जिक्र किया है।

गौरतलब है कि ब्रिटेन के पार्लियामेंट्री कमिश्नर फॉर स्टैंडर्ड्स ने मंगलवार को इस बात की पुष्टि की थी कि सारा इस मुद्दे पर वाज की जांच नहीं कराएगी। पार्लियामेंट्री कमिश्नर फॉर स्टैंडर्ड्स ने कहा था कि आयुक्त को पिछले हफ्ते कीथ वाज के खिलाफ एक शिकायत मिली थी लेकिन इसकी जांच करने का फैसला नहीं किया गया। हालांकि, भारत में विवाद गहराता जा रहा है क्योंकि विपक्ष ने सुषमा के इस्तीफे की मांग की है।


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