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कभी ललित के कारण तो कभी लिपलॉक की वजह से वसुंधरा रहीं विवादित


नई दिल्ली,(एजेंसी)18 जून। एक बार फिर से राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को लेकर सुर्खियों में हैं, वसुंधरा पर आरोप है कि ईडी के आरोपी ललित मोदी ने सीएम साहिबा के बेटे की कंपनी में करोड़ो रूपये लगाये थे और इसी कारण वसुंधरा वक्त-वक्त पर मोदी की मदद करती रही हैं।

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आपको बता दें कि कहा जा रहा है कि सीएम वसुंधरा राजे पर ने वर्ष 2011 में ललित मोदी के ब्रिटिश आव्रजन आवेदन में गवाही दी थी। कांग्रेस ने इस मामले पर वसुंधरा राजे से भी इस्तीफे की मांग की है। इस मामले का खुलासा ललित मोदी के वकीलों के दल द्वारा जारी दस्तावेजों से हुआ है। इन दस्तावेजों में इस बात का उल्लेख है कि राजे जो कि उस दौरान राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की नेता थीं, वे ललित मोदी के आव्रजन आवेदन (यात्रा संबंधी दस्तावेज) के पक्ष में थीं। हालांकि इसके लिए उनकी सख्त शर्त थी कि उनका नाम भारतीय अधिकारियों के समक्ष नहीं लिया जाएगा।

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अब इन बातों में कितनी सच्चाई है, यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है कि जब वसुंधरा राजे का नाम विवादों से जुड़ा है। वसुंधरा और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है।

आईये आपको बताते हैं कि वसुंधरा और विवाद कैसे साथ-साथ चलते हैं..

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वसुंधरा राजे पर आरोप वसुंधरा राजे पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2011 में ललित मोदी के ब्रिटिश आव्रजन आवेदन में गवाही दी थी। कांग्रेस ने इस मामले पर वसुंधरा राजे से भी इस्तीफे की मांग की है। इस मामले का खुलासा ललित मोदी के वकीलों के दल द्वारा जारी दस्तावेजों से हुआ है। इन दस्तावेजों में इस बात का उल्लेख है कि राजे जो कि उस दौरान राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की नेता थीं, वे ललित मोदी के आव्रजन आवेदन (यात्रा संबंधी दस्तावेज) के पक्ष में थीं। हालांकि इसके लिए उनकी सख्त शर्त थी कि उनका नाम भारतीय अधिकारियों के समक्ष नहीं लिया जाएगा।

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वसुंधरा का मंदिर जुलाई 2014 में जोधपुर जिले के एक बेरू गांव में वसुंधरा राजे का मंदिर बनाकर उन्हें देवी के रूप में स्थापित करने का मामला भी विवाद में आ गया। आरएसएस ने इस पर जबरदस्त आपत्ति जताई थी। विरोधियों ने आरोप लगाया था कि राजे ने खुद मंदिर के लिए पैसे दिये हैं और लोगों के सामने खुद को देवी के रूप में स्थापित करने में लगी हुई हैं।

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आरएसएस से पंगा वसुंधरा राजे एक महाराजा फैमिली से हैं, जबकि आरएसएस हमेशा चाहता था कि राजस्थान में सीएम का चेहरा कोई संघ का आदमी हो जिसके कारण वो हमेशा से वसुंधरा के सीएम बनने के पक्ष में नहीं था। जिसके लिए कभी छुपकर तो कभी खुलकर संघ और वसुंधरा के बीच में तूतू-मैंमैं होती रहती है। यही कारण है आज जब वसुंधरा राजे का नाम ललित मोदी प्रकरण में घसीटा जा रहा है तो आरएसएस और बीजेपी ने पल्ला झाड़ लिया है।

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माधवराज सिंधिया से विवाद
वसुंधरा भाजपा का एक चर्चित और कद्दावर नेता थीं तो वहीं उनके भाई माधवराज सिंधियां कांग्रेस के। दोनों ही नेतागण अगर सियासी विरासत पर आमने-सामने नहीं थे, बल्कि पारिवारिक रूप में भी दोनों की बनती नहीं थी, पहद तो तब हो गई जब प्रापर्टी विवाद को लेकर दोनों भाई-बहन खुलकर एक-दूसरे के विरोध में आ गये जिसकी वजह से दोनों ही की काफी किरकिरी हुई थी।

वसुंधरा का लिप-लॉक
वसुंधरा राजे केवल सियासत की ही खिलाड़ी नहीं हैं बल्कि उन्हें ग्लैमर प्रेमी भी कहा जाता है। उनकी मंहगी साड़ियां और जेवर हमेशा इस बात को इंगित करते हैं कि वसुंधरा राजे काफी शौकिन मिजाज रही हैं। उनके कार्यकाल में कई बार राजस्थान में फैशन शो हुए जिसमें साल 2006 में वो एक बार कैटवॉक करती भी दिखी थीं लेकिन साल 2006 का कार्यक्रम इंडिया इकॉनोमिक समिट उनके जी का जंजाल बन गया जिसमें वसुंधरा राजे और बायॉकोन कंपनी की चीफ किरण मजूमदार शॉ की लिपलॉक की तस्वीर वायरल हुई। वसुंधरा की जमकर किरकिरी हुई और भाजपा की भी, हालांकि बाद में कहा गया कि सीएम की इन तस्वीरों के साथ छेड-छाड़ की गई है लेकिन जो भी हो इस बात के लिए वसुंधरा राजे काफी दिनों तक विवादों में रहीं।


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