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इमरजेंसी की याद दिलाकर आडवाणी क्या कहना चाह रहे हैं?


नई दिल्ली,(एजेंसी)19 जून। बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी के एक इंटरव्यू से ने देश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। आडवाणी ने इमरजेंसी की आशंका से इनकार नहीं किया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आडवाणी ने इंटरव्यू के जरिये अपनी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाये हैं।

Lal Krishna Advani Narendra Modi

(AFP Photo)

विरोधियों के निशाने पर मोदी सरकार इसलिए है क्योंकि बीजेपी के ही नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इमरजेंसी की आशंका का बयान देकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इंटरव्यू में आडवाणी ने कहा है कि भारत की राजनीतिक व्यवस्था में आज भी आपातकाल की आशंका है। इमरजेंसी के बाद ऐसा कुछ नहीं किया गया जिससे भरोसा हो कि नागरिक स्वतंत्रता फिर से नष्ट या निलंबित नहीं की जाएगी। किसी के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा लेकिन मैं नहीं कह सकता कि ऐसा फिर नहीं हो सकता। लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता में कमी दिख रही है। मैं नहीं कह रहा कि राजनीतिक नेतृत्व परिपक्व नहीं है लेकिन कमियों के कारण विश्वास नहीं होता कि फिर से इमरजेंसी थोपी नहीं जा सकती।

25 जून को आपातकाल के 40 साल पूरे हो रहे हैं और उससे पहले दिये गये आडवाणी के इस इंटरव्यू को लेकर मोदी सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गई है। अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आडवाणी जी ठीक कह रहे हैं कि इमरजेंसी से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या दिल्ली उनका पहला प्रयोग है?

आडवाणी के इंटरव्यू को लेकर बीजेपी नेताओं की बोलती बंद हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि मोदी राज आने के बाद से पार्टी में हाशिये पर चल रहे आडवाणी का इशारा कहीं अपनी सरकार पर तो नहीं है।

30 साल बाद देश में मोदी के नेतृत्व में सबसे मजबूत सरकार बनी है। फिर भी आडवाणी इस माहौल में इमरजेंसी की याद दिला रहे हैं। 25 जून 1975 को देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। इमरजेंसी का मतलब होता है आजादी छीन लेना। सवाल ये है कि इस वक्त इमरजेंसी की याद दिलाकर आडवाणी क्या कहना चाह रहे हैं ?


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