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सुषमा और वसुंधरा के इस्तीफे का सवाल ही नहींः भाजपा


नई दिल्ली,(एजेंसी)20 जून। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को भाजपा ने फिलहाल खारिज कर दिया है। यह अलग बात है कि पार्टी सुषमा स्वराज की तरह वसुंधरा राजे के बचाव में खुलकर सामने नहीं आ रही है। इस राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच सुषमा शुक्रवार रात न्यूयार्क रवाना हो गईं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना है।

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ललित मोदी प्रकरण में नाम सामने आने के दो दिन बाद शुक्रवार को भाजपा थोड़ी दूरी बनाते हुए वसुंधरा राजे के बचाव में उतरी। प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने साफ कर दिया कि फिलहाल वसुंधरा राजे इस्तीफा नहीं देंगी। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि राजे के खिलाफ दिखाए जा रहे दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच नहीं हुई है।

जाहिर है दस्तावेजों के सही पाए जाने की स्थिति में पार्टी का रुख बदल सकता है। वैसे उन्होंने वसुंधरा के बेटे और भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह को एक तरह से क्लीन चिट भी दे दी। उनके अनुसार दुष्यंत सिंह ने अपनी कंपनियों में निवेश की जानकारी आयकर विभाग और चुनाव आयोग को दी थी। यही नहीं, जयपुर हाई कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई से इंकार चुका है।

राजे से दूरी बना रहा नेतृत्व
हालांकि, वसुंधरा के साथ केंद्रीय नेतृत्व दूरी बना रहा है। ऊपरी तौर पर भाजपा भले वसुंधरा राजे का बचाव कर रही हो, लेकिन अभी तक कोई वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में सामने नहीं आया है। शुक्रवार को राजे के आनंदपुर साहिब के कार्यक्रम को अंतिम समय में रद करने को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। आधिकारिक रूप से इसका कारण वसुंधरा की तबीयत खराब होना बताया जा रहा है। आनंदपुर साहिब में वसुंधरा को अमित शाह और राजनाथ सिंह के साथ मंच पर बैठना था।

मोदी और शाह ने की चर्चा
गुरुवार देर शाम को अमित शाह और नरेंद्र मोदी की मुलाकात में ललित मोदी विवाद से पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई की रणनीति पर चर्चा हुई। वैसे आधिकारिक रूप से सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वसुंधरा राजे और सुषमा स्वराज के मामले में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि इससे भाजपा की छवि खराब हुई है। एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक स्वीकार किया कि इससे बिहार विधानसभा में पार्टी को नुकसान भी हो सकता है।

‘त्यागपत्र का सवाल ही काल्पनिक है। ऐसा कोई भी तकनीकी या कानूनी आधार नहीं है, जिसके बिना पर कहा जा सके कि कोई अनुचित काम हुआ है।’

-सुधांशु त्रिवेदी, भाजपा प्रवक्ता


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