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बिना विद्यार्थियों का है यह स्कूल


इरोड,(एजेंसी)22 जून। सरकारी सहायता से करीब सात दशक पहले स्थापित स्कूल में पढ़ाने के लिए रोजाना दो शिक्षक जरूर आते हैं, लेकिन यहां पढ़ने वाला कोई छात्र नहीं है। इस स्कूल में तैनात दोनों शिक्षक रोज महज विद्यालय परिसर का ताला खोलने और फिर उसे बंद करने का काम करते हैं।

SCHOOL

प्रतीकात्मक फोटो

सरकारी सहायता प्राप्त उच्च प्राथमिक विद्यालय (आठवीं कक्षा तक) 1947 से अभी तक यहां से करीब 25 किलोमीटर दूर मोसुकरायीपलयम में एक खपरैल की छत वाले मकान में चल रहा है।

गांव के रहने वाले पालनीसामी के अनुसार, स्कूल की शुरूआत तमिल प्राथमिक विद्यालय के रूप में हुई थी। बाद में इसे उच्च प्राथमिक विद्यालय में बदल दिया गया।

पिछले वर्ष तक एक प्रधानाध्यापक और दो शिक्षक यहां 120 विद्यार्थियों को पढ़ाया करते थे। प्रधानाध्यापक मई में सेवानिवृत्त हो गए और शिक्षक वर्तमान शैक्षणिक सत्र में महज तीन बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि लगभग सभी अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला पास के अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में करा दिया है। यही वजह है कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम हो गयी है।

स्कूल के दोनों शिक्षकों ने पिछले महीने तक पांचवीं के एक और तीसरी के दो बच्चों को पढ़ाया लेकिन इन तीनों ने भी अचानक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दाखिला ले लिया। अब दोनों शिक्षक सुबह नौ बजे आते हैं और शाम पांच बजे परिसर में ताला लगाकर वापस चले जाते हैं।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कलाईसेल्वन से संपर्क करने पर उन्होंने कहा, ‘‘स्कूल को एक ट्रस्ट चलाता है जिसे सरकारी सहायता प्राप्त है। विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए स्कूल प्रशासन को कदम उठाने होंगे।’’

उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए विभाग जल्दी ही दोनों शिक्षकों का तबादला दूसरे स्कूलों में कर देगा। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से संपर्क नहीं हो सका।


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