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कई नौकरशाहों और सियासदानो की नींद उड़ा गया संजय सेठ पर छापा


लखनऊ,(एजेंसी)22 जून। एमएलसी बनने के लिए सारे जोड़ तोड़ बैठा चुके विवादित बिल्डर संजय सेठ के ठिकानों पर आयकर का छापा अब कई रसूखदारों के गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है। इस छापे के दौरान मिली डायरी के पन्ने यूपी कि सियासत और नौकरशाही के कई नामो के लिए गले की हड्डी बन सकते हैं और इसलिए इन रसूखदारों ने अपने बचने के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं।

संजय सेठ की कंपनी शालीमार बिल्डर्स में अब मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत के बाद जांच की दिशा और भी व्यापक हो गयी है। गुरुवार को शुरू हुई रेड शुक्रवार तक जारी रही और मशीन लगा कर पैसे गिने जाते रहे। इस बीच संजय के और भी लाकरों का पता चला है।

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संजय सेठ के ठिकाने से मिली एक डायरी में उन लोगों के नाम हैं जिनकी काली कमाई से संजय ने अपना कारोबार बढाया। इसमें कई नाम ऐसे नौकरशाहों के बताये जा रहे हैं जो फिलवक्त महत्वपूर्ण पदों पर तैनात है। साथ ही प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के कई बड़े नेताओं का नाम भी इसमें आने की खबर है।

स्पा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव से संजय की नजदीकी छिपी बात नहीं है। प्रतीक की पत्नी अपर्णा के सामजिक कार्यों में भी संजय दिल खोल कर मदद करता था और इसी जरिये वह विधान परिषद् की खली हुई सीटों में अपना नाम शामिल करवाने में सफल भी हो गया था।

राज्यपाल द्वारा सूची के जिन नामों के बारे में जानकारी मांगी गयी थी उसमे संजय सेठ का नाम भी शामिल था और यह भी इत्तेफाक है कि जिस वक्त संजय के ठिकानो पर आयकर विभाग छापे मार रहा था उस वक्त सीएम और गवर्नर इसी सूची के बारे में चर्चा कर रहे थे।

विभागीय सूत्रों की मानें, तो संजय की इस डायरी में उन लोगों के नाम हैं, जिन्होंने संजय के रियल स्टेट कारोबार के जरिये अपनी काली कमाई को खपाया है। यही नहीं, डायरी में जिन नेताओं के नाम है वह वर्तमान में सत्ता में अहम पदों पर बैठे हैं और कुछ अफसर शासन में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं।

आयकर अधिकारियों ने पहले ही संजय सेठ का फोन सर्विलांस पर लगा रखा था, ताकि जो लोग पैरवी करें, उनके नामों का भी पता चल सके। जांच में जहां कई बेनामी संपत्ति के सबूत मिले हैं, वहीं, कई फर्जी कंपनियों के शेयर के दस्तावेज भी सामने आए हैं।

संजय सेठ के पार्टनर खालिद मसूद के कई बैंक अकाउंट भी मनी लॉन्ड्रिंग का इशारा दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि खालिद के जरिये दुबई से पैसों का लेनदेन किया जा रहा था।


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