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मैंने इमरजेंसी देखी?


नई दिल्ली,(एजेंसी)23 जून। 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगी थी। इमरजेंसी को 40 साल पूरे होने वाले हैं। इमरजेंसी के वक्त मशहूर कवि और साहित्यकार गोपाल दास नीरज ने कविताओं से आंदोलन की ताकत बताई थी तो वहीं आरएसएस स्वंयसेवक राजा मोगल नासिक जेल से चिट्ठियां मुंबई तक पहुंचाया करते थे।

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मैंने इमरजेंसी देखी?
90 साल के गोपाल दास नीरज देश के जाने माने कवि हैं। गोपाल दास नीरज की कई कविताएं हिंदी सिनेमा के गीतों का हिस्सा भी रही हैं, लेकिन आज हम गोपाल दास नीरज की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो 40 साल पहले 25 जून 1975 को देश में लगी इमरजेंसी के गवाह हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में देश में इमरजेंसी लगाई गई थी और गोपाल दास नीरज कड़ी मनाही के बावजूद कवि सम्मेलनों में भाग ले रहे थे और अपनी कविताओं से इंदिरा गांधी को आंदोलन की आंधी से बचने की चेतावनी दे रहे थे।

1975 में देश में लगी इमरजेंसी को 40 साल हो गए हैं लेकिन हाल ही में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने इमरजेंसी की आशंका जताकर तूफान खड़ा कर दिया था, लेकिन इमरजेंसी को अपनी आंखों से देखने वाले मशहूर कवि गोपाल दास नीरज आडवाणी की आशंका से इत्तेफाक नहीं रखते।

इमरजेंसी का मतलब क्या था?
संविधान के आर्टिकल 352 के सहारे देश में इंटरनल एमरजेंसी लगाई गई थी। इसका मतलब ये था कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, बिना रोक-टोक के जब तक चाहें पावर में रह सकती थी। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की जरुरत नही थी। अखबार और मीडिया आजाद नहीं थे। उनमें वहीं बातें लिखी पढ़ी जा सकती थी जिसे सरकार ने जारी किया हो। पार्लियामेंट में अपने बहुमत के आधार पर सरकार हर तरह के कानून पास करा सकती थी।


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