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30 साल में एक रास्ता खाली नहीं करा सका प्रशासन


अलीगढ़,(एजेंसी)23 जून। सत्ता तो इकबाल से ही चलती है। लेकिन, यह ऐसा किस्सा है, जहां सरकार पर दबंगों का दबदबा भारी दिख रहा है। ये 30 साल से चकरोड पर काबिज हैं। ऐसा भी नहीं कि प्रशासन को खबर न हो। 20 से ज्यादा अर्जियां तो दो साल में ही दी जा चुकी हैं। आदेश भी हुए, लेकिन..। अब मनरेगा से रास्ता बनने की फिर उम्मीद है। क्या सरकार अपना इकबाल कायम करना चाहेगी?

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ये चकरोड है, नानऊ पुल से चांदगढ़ी और बब्बू नगला को जाने वाला। यहीं से होकर एदलपुर, भदौड़ी, शेखा, शेखापुर, भुकावली आदि 20 गांवों के हजारों लोग निकलते हैं। ये रास्ता तीन ग्राम प्रधानों के दायरे में आता है। एक, खेड़ा नरायन सिंह, दूसरा नानऊ और तीसरा चांदगढ़ी। चांदगढ़ी के प्रधान जितेंद्रपाल सिंह ने अपनी ग्रामसभा के दायरे वाली 900 मीटर चकरोड तो बनवा दी, लेकिन खेड़ा नरायन सिंह के हिस्से की 1200 और नानऊ के हिस्से की 850 मीटर सड़क पर मिट्टी भराव अभी तक नहीं हुआ है। इस रास्ते के करीब 700 फीट पर दबंगों का कब्जा है। चकरोड के पास की करीब तीन एकड़ जमीन पर भी दबंगों का कब्जा है। चांदगढ़ी निवासी संजय कुमार सिंह इस अवैध कब्जे से वन विभाग की जमीन को खाली कराने की गुहार प्रशासन से करते रहे हैं।
बकौल संजय, दो साल में 20 से अधिक पत्र लिख चुके हैं।

डीएम से लेकर एसडीएम कोल के आदेश भी हो चुके हैं। अमल के लिए लेखपाल और कानूनगो मौके पर भी गए, मगर दबंगों के दबाव में लौट आए। न जमीन खाली हुई, न ही रास्ता बन पाया। चौंकाने की बात यह भी कि मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता वाले तहसील दिवस में भी बीते साल दो सितंबर को चांदगढ़ी के हरी सिंह व पन्नालाल ने कब्जा हटाने संबंधी पत्र दिया था। कागजों में चाहे जो रिपोर्ट लगाई गई हो, हकीकत में मौके से कभी कब्जा नहीं हटा।

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर दबंगों का कब्जा है तो जरूर हटवाया जाएगा। किसी को कब्जे का अधिकार नहीं है।
-पीएस राणा, एसडीएम कोल।


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