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राजीव हत्याकांड : दोषियों की रिहाई पर लगी रोक


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नई दिल्ली,एजेंसी-20 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा से राहत पाने वाले तीन दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले पर गुरुवार को रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय में कुछ खामियां हैं।

प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इन तीन कैदियों के मामले में यथास्थिति बनाये रखने का राज्य सरकार को निर्देश दिया। इन तीन कैदियों की मौत की सजा शीर्ष अदालत ने उम्रकैद में तब्दील कर दी थी। न्यायालय ने कहा कि चार अन्य दोषियों की सजा माफी के मामले में केन्द्र नई याचिका दायर कर सकता है।
न्यायालय ने केन्द्र सरकार की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने कानून में प्रतिपादित सभी प्रक्रियागत बिन्दुओं का पालन नहीं किया है। इसलिए केन्द्र की अर्जी में उठाये गये सवालों पर विचार किया जायेगा।
न्यायालय ने कहा कि वह कैदियों की सजा माफ करने का राज्य सरकार का अधिकार छीन नहीं रहा है, लेकिन राज्यों को प्रक्रिया का पालन करना होगा। न्यायालय ने इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार और इन दोषियों को नोटिस जारी किये। इन सभी को दो सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है। इस मामले में न्यायालय अब 6 मार्च को आगे विचार करेगा।
इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने केन्द्र सरकार की अर्जी पर जोरदार तरीके से विरोध किया। राज्य सरकार ने कैदियों की रिहाई पर रोक लगाने का आदेश नहीं देने का अनुरोध किया। इस पर न्यायाधीशों ने कहा, हम राज्य सरकार के अधिकार को कमतर करके नहीं आंक रहे हैं लेकन उसके द्वारा अपनाई गयी प्रक्रिया पर गौर कर रहे हैं।
न्यायालय ने कहा कि मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने का परिणाम स्वत: ही सजा में माफी नहीं हो सकता है और जेल से कैदियों की रिहाई से पहले कानून में प्रतिपादित उचित प्रक्रिया का पालन करना ही होगा। इससे पहले आज सुबह केन्द्र सरकार ने इस मामले के दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले पर रोक के लिये न्यायालय में अर्जी दायर की।
न्यायालय इस पर सुनवाई के लिये तैयार हो गया। केन्द्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल मोहन परासरन ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि तीन दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने के शीर्ष अदालत के निर्णय पर पुनर्विचार की याचिका पर फैसला होने तक राज्य सरकार को इन कैदियों को रिहा करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने दया याचिकाओं के निबटारे में 11 साल का विलंब होने के आधार पर राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी संतन, मुरूगन (दोनों श्रीलंकाई तमिल हैं) और पेरारीवलन की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। न्यायालय के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने कल ही इस मामले के सभी सात दोषियों को रिहा करने का फैसला कर लिया था।
संतन, मुरूगन और पेरारीवलन इस समय वेल्लोर जेल में बंद हैं। राज्य सरकार ने इनके साथ ही 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे चार अन्य दोषियों नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार तथा रवीचंद्रन को भी राज्य सरकार ने रिहा करने का फैसला किया था।
राज्य सरकार ने इनकी रिहाई के मामले में अपने लिए और केन्द्र सरकार के लिये तीन दिन की समय सीमा निर्धारित की थी। टाडा अदालत ने जनवरी, 1998 में राजीव गांधी हत्याकांड के अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुये उन्हें मौत की सजा दी थी। शीर्ष अदालत ने 11 मई, 1999 को इसकी पुष्टि कर दी थी।


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