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तेलंगाना विधेयक पर संसद की मुहर


Telangana

नई दिल्‍ली,एजेंसी-21 फरवरी। संसद ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना राज्य गठित करने को मंजूरी दे दी। गठन के बाद तेलंगाना देश का 29वां राज्य होगा। राज्‍यसभा में हंगामे के बीच गुरुवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। उच्‍च सदन में इस बिल के पारित होने के बाद इसे अब राष्‍ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्‍ट्रपति के हस्‍ताक्षर के बाद तेलंगाना देश का 29वां राज्‍य बन जाएगा। टीएमसी ने इस बिल पर वोटिंग के दौरान सदन से वाकआऊट किया। वहीं, एनसीपी ने भी वोटिंग के दौरान वाकआऊट किया। गौर हो कि यह बिल लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है।

संसद ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना राज्य गठित करने को मंजूरी दे दी। गठन के बाद तेलंगाना देश का 29वां राज्य होगा। हंगामे के बीच आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही में कई बार व्यवधान उत्पन्न हुआ और कार्यवाही स्थगित भी की गई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए सीमांध्र (तटीय आंध्र और रायलसीमा) के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और डीएमके के सदस्यों ने विधेयक पारित होने से पहले सदन से बहिर्गमन किया, जबकि शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने विधेयक का विरोध किया। सीमांध्र क्षेत्र से तेलुगू देशम पार्टी के सांसदों ने चर्चा के दौरान सभापति की आसंदी के सामने ‘आंध्र प्रदेश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे लगाए।

कांग्रेस सदस्यों की सुरक्षा घेरे में सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीमांध्र क्षेत्र को पांच वर्षो तक विशेष पैकेज देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहायता के लिए 13 जिलों वाले शेष आंध्र प्रदेश को पांच वर्षो तक विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति अत्यंत मजबूत होगी। विधेयक पारित होने से पहले विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कानून एवं व्यवस्था से संबंधित शक्तियां राज्यपाल को दिए जाने के प्रस्ताव के बारे में संविधान संशोधन की जरूरत है। लेकिन सरकार इससे सहमत नहीं हुई। जेटली ने कहा कि आंध्र प्रदेश का बंटवारा कर तेलंगाना के गठन का फैसला ‘कानूनी रूप से सही है।

उन्होंने सवाल किया कि कानून एवं व्यवस्था राज्य का विषय हो ता है। राज्यपाल केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होता है। क्या आप बिना संशोधन यह (कानून एवं व्यवस्था) उन्हें सौंपेंगे? विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले 60 वर्षों से तेलंगाना की मांग चली आ रही थी। गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने कहा कि कई दलों की मदद से विधेयक पारित हुआ है।

इससे पहले, बीजेपी के ओर से लाए गए संशोधनों पर भी सदन में वोटिंग हुई। राज्यसभा में आज भाजपा सहित कई दलों के सदस्यों ने तेलंगाना विधेयक का समर्थन करते हुए सीमांध्र क्षेत्र के लोगों के हितों की रक्षा के लिए विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत पर बल दिया। वहीं एक केंद्रीय मंत्री ने विधेयक का विरोध कर सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया। तेदेपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस सहित कई दलों के सदस्यों ने भी इस विधेयक का भारी विरोध किया।

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक विधेयक 2014 पर चर्चा में भाग लेते हुए पर्यटन मंत्री चिरंजीवी ने मौजूदा प्रारूप में विधेयक का विरोध किया और तेलंगाना तथा सीमांध्र दोनों क्षेत्रों पर ध्यान दिए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अलावा अन्य नेताओं के साथ सलाह मशविरा नहीं किया गया। इस मुद्दे पर अपनी सरकार की आलोचना करते हुए चिरंजीवी ने भाजपा, तेदेपा सहित कई दलों पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि तेलंगाना मुद्दे पर दोहरे मानदंड अपनाए गए हैं।

इसके बाद विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए सवाल किया कि क्या कोई मंत्री अपनी सरकार के ही खिलाफ बोल सकता है। इस पर उपसभापति पीजे कुरियन ने कहा कि यह सदस्य पर निर्भर करता है कि वह क्या बोलना चाहते हैं और यह सत्तापक्ष पर है कि वह बोलने के लिए किस सदस्य को अनुमति देता है। चिरंजीवी ने अपने पहले भाषण में कहा कि अलग राज्य के मुद्दे पर उनकी व्यक्तिगत राय में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है लेकिन वह अपनी पार्टी के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के करोड़ों तेलुगू लोगों की ओर से बोल रहे हैं और वह किसी एक क्षेत्र की ओर से नहीं बोल रहे हैं। उन्होंेने हैदराबाद को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने की मांग की। इसके पहले भाजपा सदस्य एम वेंकैया नायडू ने चर्चा की शुरुआत करते हुए वह तेलंगाना बनाए जाने के पक्ष में हैं लेकिन सीमांध्र क्षेत्र के विकास की ओर भी पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि तेलंगाना मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से उनकी पार्टी पर कई बार गलत आरोप लगाए जाते रहे हैं जबकि खुद कांग्रेस में ही इस मुद्दे पर एक राय नहीं है और आंध्र प्रदेश विधानसभा में इसके विरोध में प्रस्ताव भी लाया गया।

उन्होंने आम चुनाव के ठीक पहले नए राज्य के गठन पर सवाल उठाए। उन्होंने सीमांध्र के लिए उचित आर्थिक पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि हैदराबाद की ही तरह सीमांध्र क्षेत्र में भी शिक्षण संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए। उन्होंने रायलसीमा सहित अन्य पिछडे क्षेत्रों का विकास किए जाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि माकपा सहित सभी दलों ने तेलंगाना बनाए जाने का समर्थन किया है। माकपा के सीताराम येचुरी ने नायडू की इस बात का प्रतिवाद किया और कहा कि उनकी पार्टी हमेशा विभाजन के विरोध में रही है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के लिए कांग्रेस और भाजपा जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से कई स्थानों पर नए राज्यों के गठन की मांग उठेगी। उन्होंने कहा कि पिछड़े राज्यों के साथ एकसमान व्यवहार किया जाना चाहिए और उनके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। बसपा नेता मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी बड़े प्रदेशों को विभाजित कर छोटे राज्य बनाए जाने के पक्ष में है। उन्होंने राज्य पुनर्गठन आयोग के जरिए बड़े राज्यों का विभाजन किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब उनकी पार्टी की सरकार थी तो इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया था। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए वह आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि साफ है कि जहां अपना हित है, वहां वे विभाजन कर रहे हैं।

उन्होंने तेलंगाना में राजधानी के मुद्दे पर जल्दी फैसला किए जाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने से संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों की हालत अच्छी नहीं है, उन्हें विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश की 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की भी मांग की। जदयू के एनके सिंह ने सीमांध्र की तरह बिहार सहित अन्य पिछड़े राज्यों को भी विशेष पैकेज की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बिहार के साथ जो वायदा किया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया।

उल्लेखनीय है कि देश का 29वां राज्य तेलंगाना तेलुगूभाषी लोगों के लिए अब दो राज्य हो जाएगा। इसमें हैदराबाद सहित 10 जिले होंगे। तेलंगाना के अलग हो जाने के बाद अब आंध्र प्रदेश में 13 जिले रह जाएंगे। 10 साल तक दोनों राज्यों की राजधानी हैदराबाद रहेगी। 1.14 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला और 3.52 करोड़ की आबादी वाला तेलंगाना राज्य बनने के बाद आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से देश का 12वां सबसे बड़ा राज्य होगा।


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