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प्रदेश में छात्रवृत्ति के 32 लाख से ज्यादा आवेदन निरस्त


लखनऊ,(एजेंसी)10 जुलाई। आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों की दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना फर्जीवाड़े का शिकार हो गयी है। इस वर्ष योजना के तहत आए 32 लाख से ज्यादा आवेदन निरस्त किये गए हैं।

दसवीं उत्तीर्ण करने के बाद धन की कमी के कारण पढ़ाई न रुकने देने के लिए सभी वर्गों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की योजना प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जाती है। इनमें 11वीं व 12वीं में अध्ययन के अलावा सामान्य स्नातक, बीटेक, एमबीबीएस आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाता है और उनकी शुल्क प्रतिपूर्ति की जाती है। इसमें ऐसे सभी छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकते हैं, जिनके अभिभावकों की आय दो लाख रुपये वार्षिक या उससे कम है।

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बीते पांच वर्षों से इस योजना में कई गड़बडिय़ों की शिकायतें मिल रही थीं। इस बार जबर्दस्त स्क्रीनिंग करने के साथ ऑन लाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गयी। स्क्रीनिंग व ऑनलाइन आवेदन से पहले ही आवेदन करने वालों की संख्या खासी कम हो गयी थी, ऊपर से अब आधे से ज्यादा आवेदन निरस्त हो गये हैं।

इस वर्ष कुल 59 लाख छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था। इनमें से महज 26.9 लाख को छात्रवृत्ति मिली है और शेष 32.1 लाख आवेदन निरस्त किये गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर 54.4 प्रतिशत आवेदन निरस्त हुए हैं। जहां तक अलग-अलग वर्गों के आवेदनों की बात है तो अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के 52-52 प्रतिशत, अल्पसंख्यकों के 65 प्रतिशत व सामान्य वर्ग के 59 प्रतिशत आवेदन निरस्त हुए हैं। अनुसूचित जाति के 18 लाख आवेदनों में से 8.6 लाख, अन्य पिछड़ा वर्ग के 26.5 लाख में से 12.7 लाख, अल्पसंख्यकों के 5.5 लाख में से 1.9 लाख व सामान्य वर्ग के नौ लाख आवेदनों में से 3.7 लाख को छात्रवृत्ति मिली है। ऐसे में जिन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति या शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली है, वे परेशान हैं।

सही हैं तो करें प्रत्यावेदन
प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) सुनील कुमार के साथ हुई बैठक में तय हुआ कि जो अभ्यर्थी अपने आवेदन को पूरी तरह सही मानते हैं वे तुरंत प्रत्यावेदन करें। उनके आवेदन पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति विचार कर 31 जुलाई तक हर हाल में राज्य मुख्यालय भेज देगी। उन सभी आवेदनों को छात्रवृत्ति देने के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू होगी।

स्क्रूटनी से हुई छंटनी
धांधली रोकने के लिए 26 बिंदुओं पर स्क्रूटनी की गयी है। उसी के परिणाम स्वरूप आवेदन निरस्त हुए हैं। प्रत्यावेदनों पर भी विचार होगा, ताकि कोई सही अभ्यर्थी निराश न हो।
-जी राम, निदेशक, समाज कल्याण


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